RAW

जयंती विशेष: इंदिरा सरकार को एक ऐसी एजेंसी की जरूरत थी जो दुश्मन की जानकारी दे सके, जानें 6 बातें

‘रॉ’ की स्थापना सिनो-इंडियन युद्ध और इंडिया-पाकिस्तान युद्ध के बाद 21 सितम्बर, 1968 में हुई थी। वर्ष 1968 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनकी सरकार को एक ऐसी संस्था की जरूरत महसूस हुई जो आतंकवाद हमलों के समय, जंग की हलचल में दुश्मन की ताकत का जाना जा सके। रॉ के बारे में आप जितन पढ़ेंगे लगेगा कि अभी भी जानकारी अधूरी है। भारत की शक्तिशाली खुफिया एजेंसी- RAW ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ के बारे में जानें कुछ रोचक बातें-





इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लिया गया निर्णय 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर में रॉ की बुनियाद रखी गई।  RAW का मकसद युद्ध में जाने से पहले और युद्ध के बाद कभी भी भारत को दुश्मन की आंतरिक स्थिति से वाकिफ कराना।

‘रॉ’ पर बनी फ़िल्में आपको जरूर प्रभावित करती होंगी क्योंकि इसका काम ही ऐसा है। रॉ को चकमा देना नामुमकिन है। ‘रॉ’ एजेंट्स के पास बड़े हथियार नहीं होते, मगर बड़े-बड़े मिशन पूरे करते हैं। वे साधारण रूप में हमारे साथ रहते हैं लेकिन उनकी पहचान कभी जाहिर नहीं होती।  बता दें कि ‘रॉ’ का मुख्यालय नई दिल्ली में है।

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