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चीन सीमा: चीनी सैनिकों की धमकी के बाद लौटे चरवाहे

चरवाले

चमोली(उत्तराखंड)। चमोली जिले में चीन सीमा पर तनाव के बीच चरवाहे अपनी भेड़-बकरियों के साथ समय से पहले ही जोशीमठ वापस लौट आए हैं। जानकारों के मुताबिक चीनी सैनिकों की तरफ से धमकाए जाने के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने इन चरवाहों को सीमा क्षेत्र से सुरक्षित वापस लौटने की सलाह दी है।





फिलहाल अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। जोशीमठ के एसडीएम योगेंद्र जोशी ने कहा कि हर साल चरवाहों को सीमावर्ती क्षेत्रों में जाने की अनुमति दी जाती है। इस बार करीब 51 चरवाहों को अनुमति दी गई थी। सीमा से सटे क्षेत्र से चरवाहे लौट रहे हैं या नहीं, उन्हें इस बारे में सूचना नहीं हैं।

चरवाहे हर साल अपनी भेड़-बकरियों के साथ पहुंचते हैं

चमोली जिले के नीती-माणा दर्रे के पास चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में चरवाहे हर साल अपनी भेड़-बकरियों के साथ पहुंचते हैं। गर्मी शुरू होते ही चरवाहे बुग्यालों (मखमली हरी घास के मैदान) की ओर चले जाते हैं और सितंबर में सर्दियां शुरू होने पर ही वापस लौटते हैं। लेकिन इस बार वे अगस्त में ही सीमावर्ती क्षेत्रों से नीचे की ओर आने शुरू हो चुके हैं।

इसके पीछे चीन सीमा पर जारी तनाव को कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले चीनी सैनिकों ने बाड़ाहोती इलाके में कुछ चरवाहों को न सिर्फ धमकाया बल्कि कुछ के तंबू भी उखाड़ दिए थे। जबकि चरवाहे इस बारे में कुछ नहीं कर रहे लेकिन सीमा क्षेत्र में तनाव की बात मानी।

गांव के एक चरवाहे के मुताबिक वे वर्षों से यहां भेड़-बकरियों के साथ सीमा क्षेत्र में आवाजाही करते रहे हैं। इस साल भी वे बकरियों को बाड़ाहोती क्षेत्र में ले गए थे पर सीमा तनाव की स्थिति देख उन्हें वापस लौटना पड़ा। चरवाहे ने ये भी बताया कि इस बार सीमा पार काफी हलचल देखी जा रही है।

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