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स्वतंत्रता दिवस स्पेशलः मेरे देश की धरती सोना उगले…

मनोज-कुमार

देशभक्ति की फिल्मों की जब भी बात होती है, सबसे पहला जो नाम जेहन में आता है वो है मनोज कुमार का। मनोज कुमार ने उपकार से लेकर क्रांति तक कई देशभक्ति की फिल्में बनाईं। उपकार इस कड़ी की पहली फिल्म थी। हालांकि इससे पहले वे शहीद में काम कर चुके थे, लेकिन बतौर निर्देशक उपकार उनकी पहली फिल्म थी।





उपकार फिल्म के निर्माण की कहानी भी दिलचस्प है। हुआ यूं कि वर्ष 1965 में फिल्म शहीद देखने के लिए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को आमंत्रित किया। शास्त्रीजी ने उनसे बातों-बातों में कह दिया कि जय जवान जय किसान पर फिल्म बन सकती है क्या। अगले दिन मनोज कुमार को ट्रेन से मुंबई (उन दिनों बंबई) लौटना था। ट्रेन में ही मनोज कुमार ने जय जवान जय किसान की थीम पर उपकार फिल्म की रूपरेखा तैयार कर ली। दो भाइयों के बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाने वाली इस फिल्म में मनोज कुमार ने किसान और जवान दोनों की भूमिका निभाई।

फिल्म के पहले हिस्से में वह एक किसान बनते हैं जो देश के नागरिकों के लिए अन्न पैदा करता है तो दूसरे हिस्से में यही किसान देश की रक्षा के लिए फौज में भर्ती हो जाता है। इस फिल्म में मनोज कुमार ने भारत नामक युवक का किरदार निभाया। दिलचस्प यह है कि दर्शकों को भारत नाम इतना पसंद आया कि वे भारत कुमार नाम से विख्यात हो गए। बाद में पूरब और पश्चिम, रोटी, कपड़ा और मकान से लेकर क्रांति तक कई फिल्मों में उन्होंने जो पात्र निभाया, उसे भारत नाम ही दिया।

फिल्म का गीत-संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ। गुलशन बावरा लिखित गीत मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती… तो आज भी खूब सुना जाता है। इसके अलावा कसमे वादे प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या… आई झूम के बसंत झूमो संग-संग… भी खूब सुने गये।

खलनायक के रूप में बरसों तक पर्दे पर दहशत का खेल खेलने वाले प्राण ने मलंग बाबा के रूप में ऐसा अभिनय किया कि खलनायक की इमेज पीछे छूट गई और वे चरित्र भूमिकाओं में रच-बस गए। उपकार को कई फिल्मफेयर और राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।

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