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लद्दाख में तनातनी के बीच भारत ने चीन के मंसूबों के मद्देनजर शुरू की अपनी तैयारी

लद्दाख में लैंडिंग
फाइल फोटो

नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनातनी अभी भी कायम है। पांच स्तर की बातचीत के बाद भी चीन की सेना पैंगोंग त्सो क्षेत्र में बनी हुई है और अपनी पुरानी स्थिति में लौटने को तैयार नहीं हैं। चीन की नापाक मंसूबों को ध्यान में रखते हुए भारत भी लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।





भारतीय पूर्वी लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाके में सैनिकों को मोबाइल बख्तरबंद सुरक्षा वाहन मुहैया कराने की दिशा में कार्य कर रही है। सेना ‘अमेरिका स्ट्राइकर इन्फैंट्री कॉम्बिनेशन व्हीकल’ और ‘हुमवे’ के साथ स्वदेशी ‘टाटा व्हीकल आर्म्ड प्रोटेक्शन’ सहित तीन अलग-अलग वाहनों के बीच किसी एक को अपने बेड़े में शामिल करने पर विचार कर रही है।

सेना को पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सैनिकों की त्वरित आवाजाही के लिए बख्तरबंद पैदल सेना के वाहनों की आवश्यकता है। चीन ने इस इलाके में बड़ी संख्या में अपने बख्तरबंद वाहन तैनात किए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना उन तीन विकल्पों पर गौर कर रही है जिनमें टाटा व्हैप, अमेरिकी स्ट्राइकर और हुमवे शामिल हैं।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि फिलहाल बल द्वारा विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है और बहुत जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान और सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए निश्चित रुप से विदेशी उत्पादों की जगह स्वदेशी को प्राथमिकता दी जाएगी।

टाटा व्हैल, जिसे DRDO प्रयोगशाला के साथ सह-विकसित किया गया है, हाल के दिनों में कई परीक्षणों से गुजरा है जिसमें उच्च ऊंचाई परीक्षण शामिल है। वहीं स्ट्राइकर और हुमवे काफी समय से अमेरिकी रक्षा दल का हिस्सा है।

गौरतलब है कि भारतीय सेना बड़ी संख्या में रूसी मूल के बीएमपी पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों का इस्तेमाल करती है जिनका उपयोग भारतीय सेना के मैकेनाइज्ड इम्फेंट्री रेजिमेंट द्वारा रेगिस्तान, मैदानों और ऊंचाई वाले स्थानों में किया जाता है।

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