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‘मरे तो लाश डस्टबिन में डाल पहाड़ी से फेंक देंगे’

मानसरोवर यात्रा

नई दिल्ली/मेरठ। डोकलाम को लेकर भारत-चीन के तनाव का असर कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को चीनी अफसरों की बेरुखी का शिकार होना पड़ रहा है। बार-बार चेकिंग कर परेशान किया जा रहा है। कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे मेरठ के ओथ कमिश्नर एसडी गौड़ ने अपने कटु अनुभव बांटे।





कमिश्नर एसडी गौड़ ने कहा कि डोकलाम तनाव की वजह से चीनी अफसर श्रद्धालुओं से अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं। रक्षापुर के रहने वाले निवासी डॉ. एसडी गौड़ (70 वर्ष) पत्नी (65 वर्ष) संग 13 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुए थे। रविवार को मेरठ लौटे डॉ. गौड़ चीनी अधिकारियों के व्यवहार से गमजदा है। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ से नेपाल होते हुए वायुमार्ग से तगलाकोट व सिमीकोट पहुंचे। इससे आगे कई बार चेकिंग से गुजरना पड़ा। सामान भी जब्त कर लिया जाता और एक घंटे बाद बैग से बाहर बिखरा हुआ सभी सामान दे दिया जाता।

डॉ गौड़ के अनुसार हजारों फीट की ऊंचाई पर पुरांग में चीनी अफसरों ने सभी के कागजात चेक किए। ज्यादा उम्र बताकर हम दोनों को आगे की यात्रा के लिए चीनी अधिकारियों ने मना कर दिया। अधिकारियों ने 60 साल उम्र तक के लोगों को ही जाने दिया। हमने तमाम कोशिशें की, लेकिन कोई नहीं माना। मेरी पत्नी रोने लगी। चीनी अफसरों ने कहा कि एक ही शर्त पर जा सकते हैं। आप की कोई एंट्री नहीं की जाएगी। मरने पर आप का शव डस्टबिन में डाल पहाड़ियों से नीचे फेंक देंगे। हमने शर्त मान ली और यात्रा पूरी की। कैलाश मानसरोवर की दुर्गम यात्रा करने वाले 35 सदस्यीय ग्रुप में यूपी से डॉ. गौड़ दंपति थे। ग्रुप में 5 शेरपा थे, जो चीनी नागिरकों-अफसरों के साथ अनुवादक का काम करते थे। गौड़ ने बताया कि वह भारत-चीन सीमा पर दो दिन फंसे रहे। मौसम खराब होने के कारण हेलिकॉप्टर की सेवा रोक दी गई।

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