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…जब फौजियों ने ही खोली फौज में भर्ती की ‘पाठशाला’

जवानों की ट्रेनिंग

महाराजगंज। महाराजगंज का खजुरिया गांव जिसकी आबादी महज दो हजार के करीब है। लेकिन इस गांव से सेना और अर्धसैनिक बलों में चुने गए 12 जवानों ने कुछ ऐसा काम किया है जिससे वहां के नौजवान काफी उत्साहित हैं।





सभी 12 जवानों ने यहां सेना और पैरामिलिट्री के लिए भर्ती पाठशाला लगा दी है। यह खास पाठशाला सुबह सूर्य उदय से पहले गांव के नौजवानों को जगा देती है। फिर शुरू होती है अनुशासन से भरी दौड़, दण्ड-बैठक, सपाट, रस्सी चढ़ाई, ऊंची कूद, लंबी कूद, जैसी शारीरिक कवायदों और पढ़ाई की क्लास। ये क्लास लगाने वाले और उसमें शामिल हर जवान का टारगेट है सेना में भर्ती होकर देश की सेवा के लिए अपने आप को तैयार कर लेना। खजुरिया में सेना के लिए यह जुनून वाजिद अली के सीआईएसएफ में चुने जाने के बाद आया। जब वह चुना गया था स वक्त गांव में कोई सुविधा नहीं थी।

वाजिद गांव की तंग और खास्ताहाल सड़कों पर दौड़ लगाते, बागीचे में बिम खींचते रस्सी चढ़ाई जैसे जज्बे और जुनून के बाद अर्धसैनिक बल के लिए चुना गया। वह वर्ष 1996 में सीआईएसएफ में सेलेक्ट हुए थे। वाजिद जब प्रशिक्षिण प्राप्त कर लौटे तो नौजवान उनके पास आकर उनके अनुभवों के बारे में पूछने लगे।

सेना के प्रति नौजवानों की दिलचस्पी ने वाजिद अली के जेहन में उन्हें भर्ती के लिए प्रेरित और तैयार करने का विचार आया। वह हर वर्ष एक महीने की छुट्टी लेकर गांव आते और इस पाठशाला में जान डालकर चले जाते।

इस पाठशाला का सारा खर्च फौजी ही देते है। इस समय अजीत सिंह गांव में छुट्टी लेकर पहुंचे हैं। उनकी देखरेख में लगभग 25 नौजवान सेना में भर्ती की तैयारी में जी-जान से जुटे हैं। फौजी अजीत सिंह के मुताबिक अपने गांव के नौजवानों में सेना को लेकर दिलचस्पी देखकर अच्छा लगता है। एक बार जो इसकी तैयारी में जुट जाता है उसे कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ती। देश सेवा का जज्बा खुद पैदा हो जाता है।

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