Aapni Baat

जवानों के लिए BSF की सार्थक पहल

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

देश की सीमाओं की कठिन परिस्थितियों में रक्षा करने वाले सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपने जवानों में अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति से निबटने के लिए जो परियोजनाएं शुरू की हैं वे बेहद सार्थक, लाभकारी, प्रेरणादायी और अमल करने योग्य हैं। फिलहाल न केवल बीएसएफ बल्कि अन्य अर्द्धसैनिक बल तथा सेना तक के जवानों में प्रतिकुल हालात में कार्य करते-करते दबाव, निराशा व अवसाद की समस्या बन रही है और कई सैनिक मनोबल के अभाव में आत्महंतात्मक कदम उठाकर जिन्दगी से तौबा कर रहे हैं। हालांकि सभी बल व सेनाएं सार्थक पहल कर समस्या पर ध्यान दे रही हैं। पर सीमा सुरक्षा बल की वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई ये परियोजनाएं देश की सैन्य सेवा से जुड़ी अन्य एजेंसियों के लिए मार्गदर्शक का काम कर सभी के लिए प्रेरणादायी साबित होंगी।





यह सही है कि सेना तथा अर्द्धसैनिक बलों की ट्रेनिंग शारीरिक-मानसिक रूप से कठिन से कठिन हालात पर काबू पाने के लिए दी जाती है औऱ उन्हें साहस, पराक्रम व शौर्य के वे पाठ पढ़ाए जाते हैं जो सरहद की सुरक्षा तथा दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब में सक्षम होते हैं। ये जवान अपने जज्बे और दिए गए प्रशिक्षण से देश के भीतर और सीमा पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। पर मनुष्य तो अंततः सामाजिक प्राणी है फिर चाहे वह सैन्य बलों का जांबाज जवान हो या खतरनाक कमांडो। बेहद जटिल, विकट व दुरुह स्थितियां कुछ जवानों का मानसिक संतुलन तहस-नहस कर तथा परिवार व सैन्य सेवा के बीच दरार पैदा कर उन्हें बेचैनी, व्याकुलता व अवसाद की गहरी खाई की और ढकेल देती हैं। यह चिंताजनक है।

पर जैसा कि सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के. के. शर्मा इस बात को स्वीकार भी करते हैं कि परिवार के साथ छुट्टी बिता कर लौटने के बाद कुल मामलों में से 90 प्रतिशत जवान 10-15 दिन के भीतर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। तो ऐसे में बीएसएफ की यह पहल कारगर रूप से लाभकारी साबित होगी। इस बल ने अपनी पायलट परियोजनाओं को लागू करने के लिए चुनिंदा ठिकानों का निर्धारण भी किया है ताकि जल्द व प्रभावी रूप से काम हो सकें। आज समूची सेना व अन्य सैन्य बल बदले हुए सैनिक परिदृश्य में मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। रात-दिन, गर्मी-सर्दी, भूख-प्यास उनकी कर्तव्यनिष्ठा के सामने बौने हैं। वर्तमान हालत में सिर्फ जरूरत है कुछ जवानों की मानसिकता को संतुलित करने व हालात पर अपना नियंत्रण बनाने की। ताकि वे अपना देश के प्रति कर्तव्य व परिवार के दायित्वों में सामंजस्य बिठा कर आगे बढ़ सकें।

Comments

Most Popular

To Top