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जरा सी बात और फिर शुरू हुआ ‘महाभारत’, इतिहास के 5 प्रसिद्ध ‘प्रतिशोध’

कहा जाता है कि क्रोध से बदले की भावना उत्पन्न होती है और बदला कई बार युद्ध की ओर धकेल देता है। कभी धन की इच्छा से तो कभी अपमान का बदला, तो कभी स्त्री के सम्मान के लिए प्रतिशोध। अगर हम दुनिया के इतिहास पर नजर डालें तो ऐसी कितनी ही कहानियां हैं जिनके युद्ध का कारण सिर्फ एक बदले का भाव ही था। आज हम बता रहे हैं दुनिया कि कुछ ऐसी ही कहानियां जो बदले की नींव पर खड़ी की गईं..?





एक दूसरे का अपमान बना ‘महाभारत’ का कारण

माना जाता है कि कौरवों और पांडवों के बीच खेले गए चौसर ने महाभारत युद्ध को जन्म दिया। लेकिन देखा जाए तो इस युद्ध की नींव भी अपमान और बदले की भावना ने ही रखी थी। ऐसा कहा जाता है कि एक बार इंद्रप्रस्थ के शानदार महल में सभा के दौरान दुर्योधन फिसल गया था। द्रौपदी ने इस बात का हंसते  हुए मजाक उड़ाया। दुर्योधन ने इसे अपना अपमान समझा और इसका बदला लेने के लिए चालें चलनी शुरू कर दीं।उसने  कौरवों व पांडवों के बीच चौसर खेलने की इजाजत मांगी। भीष्म द्वारा चौसर खेलने की इजाजत मिलने के बाद चौसर शुरू किया गया। जिसमें युधिष्ठिर अपनी पत्नी व् भाइयों को भी जुए में हार गए। इस दौरान दुर्योधन ने द्रोपदी का भरी सभा के बीच अपमान कर प्रतिशोध जो आगे चलकर विश्व के सबसे प्रसिद्ध युद्ध ‘महाभारत’ का कारण बना। कौरवों की 11 अक्षौहिणी तथा पाण्डवों ने 7 अक्षौहिणी सेना के बीच यह युद्ध लड़ा गया। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि महाभारत के युद्ध के बाद सिर्फ 18 योद्धा ही जीवित बचे थे जिनमें से 3 कौरवों की तरफ से थे और 15 पांडवों की ओर से थे। यह युद्ध इतना विकराल और भयंकर था कि इससे मानव धन का नुकसान तो हुआ ही उसके साथ-साथ भारत की संस्कृति, धर्म, समाज, सभ्यता का भी पतन हुआ।

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