Listicles

‘जलियांवाला बाग़’ में आज भी मौजूद हैं गोलियों के निशान, जानें 7 अहम तथ्य

13 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में एक काले दिन के रूप में अंकित है। इस दिन वर्ष 1919 में पंजाब के अमृतसर में ‘जालियांवाला बाग़ हत्याकांड’ हुआ था। जहां एक अंग्रेज जनरल के आदेश पर हजारों की संख्या में मौजूद निहत्थे लोगों को गोलियों से भून डाला गया। मंजर इतना खतरनाक था कि कुछ जान बचाने के लिए कुएं में कूद गए तो कुछ ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। यह दिन उन लोगों के लिए मातम में बदल गया तथा जो अपने परिवारों के साथ बैसाखी का मेला देखने आए थे। आज हम आपको दिखा रहे हैं इस निर्मम हत्याकांड से जुड़ी कुछ खास तस्वीरें जो बयान करती हैं उस साजिश की कहानी :-





‘रौलेट एक्ट’ का विरोध बना था इस हत्याकांड की वजह

दक्षिण अफ़्रीका से भारत आ चुके गांधी जी की लोकप्रियता भारत में धीरे-धीरे बढ़ रही थी। उन्होंने ‘रौलेट एक्ट’ का विरोध करने का आह्वान किया जिसे कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने और अधिक नेताओं और जनता को रौलेट एक्ट के अंतर्गत गिरफ़्तार किया और कड़ी सजाएं भी दीं। इससे जनता का आक्रोश बढ़ा और लोगों ने रेल और डाक-तार-संचार सेवाओं को बाधित किया। रोलेट एक्ट के खिलाफ यह आंदोलन अप्रैल के पहले सप्ताह में अपने चरम पर पहुंच चुका था।

Comments

Most Popular

To Top