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देश की अहम जांच एजेंसी NIA से जुड़ी 8 बातें

एनआईए

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आतंकवाद सम्बन्धी घटनाओं की जांच करने वाली देश की अहम जांच एजेंसी है जो गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है। अपनी स्थापना के कुछ ही वर्ष के अंतराल में अपनी कार्यकुशलता के बल पर इस जांच एजेंसी ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अपराधियों के खिलाफ सुबूत जुटाने उन्हें दोषी ठहराने तक के बीच की अपनी इन्वेस्टिगेशन को बेहतरीन तरीके से पूर्ण करने वाली एनआईए के बारे में आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी बातें जिन्हें जानकार आप कहेंगे वाह क्या बात हैः





मुंबई हमले के बाद किया गया गठन

वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद देश में ऐसे हमलों के लिए एक विशेष जांच एजेंसी की आवश्यकता महसूस की गई। अगले ही वर्ष 2009 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का गठन किया गया।

वाईसी मोदी होंगें NIA के महानिदेशक

इसके संस्थापक महानिदेशक राधा विनोद राजू थे जिनका कार्यकाल 31 जनवरी 2010 को समाप्त हुआ। इन के पश्चात यह कार्यभार शरद चंद्र सिन्हा ने संभाला। जुलाई 2013 में शरद कुमार NIA प्रमुख बने। इस माह के अंत में NIA की कमान वाईसी मोदी संभालेंगे वह 1984 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।

एजेंसी के पास कुल 166 मामले

गठन के बाद से एजेंसी को अभी तक 166 केस सौंपे गए जिसमें देश में आतंकवादी चुनौतियों को लेकर लगभग हर तरह के मामले शामिल हैं। 63 मामले जिहादी आतंकवाद, 25 पूर्वोत्तर से जुड़े उग्रवादी संगठनों,  41 आतंकवादी मामलों में वित्तीय सहायता और नकली नोट, 13 मामले वामपंथ उग्रवाद जबकि शेष 24 मामले अन्य आतंकवादी घटनाओं और गैंग से जुड़े थे।

इस वर्ष एजेंसी को मिली सफलता

13 दिसंबर 2016 को इस एजेंसी को बड़ी सफलता मिली, जब हैदराबाद में एनआईए की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के पांच सदस्यों को हैदराबाद के दिलसुखनगर क्षेत्र में 21 फरवरी, 2013 को दोहरे विस्फोट के लिए दोषी करार दिया। उसके बाद 19 दिसंबर, 2016 को विशेष अदालत ने अभियोजन तथा बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पांचों दोषी अभियुक्तों को मौत की सजा सुना दी।

ये होती हैं जिम्मेदारियां

एजेंसी की जांच में इलेक्ट्रॉनिक सूचना का विश्लेषण करना, आवाजों के नमूने लेना, अंतरराष्ट्रीय कॉल्स का ब्योरा हासिल करना, गवाहों से पूछताछ करना, बेहद जटिल डीएनएन प्रोफाइलिंग करना और एक वर्ष में जुटाए गए सभी सबूतों का निरीक्षण करना शामिल होता है। जिसका विशेष अधिकारी दल द्वारा विश्लेषण किया जाता है।

बनकर उभरी एक बेहतर जांच एजेंसी

शुरुआत में इसे दिल्ली में ही केंद्रित संगठन माना गया था, जिसे राज्यों में अपराध शाखाओं, विशेष जांच दलों (एसआईटी) और विशेष कार्य बलों (एसटीएफ) से मुकाबला करना पड़ता। शुरुआती दिनों में इसके सामने बाधाएं भी आईं, क्योंकि राज्य नई संस्था को महत्व देने के लिए तैयार ही नहीं थे। कई बार मामले सौंपने में देर करते थे या  सहयोग नहीं करते थे। लेकिन धीरे-धीरे एजेंसी ने इन समस्याओं से पार पा लिया और अब वह आतंकवाद रोधी मामलों की जांच करने वाली बुनियादी एजेंसी बनकर उभर चुकी है।

नई दिल्ली में NIA का मुख्यालय

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अब अपना हेडक्वार्टर होगा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में 10 अक्टूबर 2017 को एनआईए के नए मुख्यालय का उद्घाटन किया। एनआईए मुख्यालय की आधारशिला 10 सितंबर,2015 को राजनाथ सिंह ने रखी थी और इसका कार्य निर्धारित 24 महीनों के भीतर पूरा हुआ है।

यह है एनआईए का विशेष सेल  

एनआईए ने अब एक अलग विशेषज्ञ प्रकोष्ठ ‘टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी सेल (टीएफसीसी सेल)’ स्थापित कर लिया है, जो जाली भारतीय मुद्रा तथा आतंकवादियों को वित्तीय सहयोग जैसे मामलों से निपटता है। यह प्रकोष्ठ आतंवादियों को दी जा रही मदद तथा जाली भारतीय नोटों (एफआईसीएन) की जानकारी रखता है। यह आतंकवादियों को आर्थिक सहायता दिए जाने के मामले भी खंगालता है। इनकी जांच एनआईए नियमित तौर पर करती है।

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