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तिहाड़ के कैदी लोगों की जिंदगी में बिखेरेंगे ‘खुशबू’

नफीसा अली

नई दिल्ली। समाज की मुख्य धारा से कटे तिहाड़ जेल के कैदियों ने लोगों की जिंदगी में खुशबू बिखेरने की अनोखी पहल की है। दरअसल, तिहाड़ जेल के कैदी अब परफ्यूम भी बनाएंगे। इसके लिए जेल प्रशासन ने जेल नंबर- 07 में ‘स्कूल ऑफ परफ्यूम एंड फ्रेगरेंस’ की शुरुआत की है। यहां कैदियों को परफ्यूम बनाना भी सिखाया जाएगा। कैदियों द्वारा निर्मित परफ्यूम को बाजार में ‘वाह ओ’ नाम से लॉन्च किया जाएगा। इसकी ब्रांड एंबेस्डर सामाजिक कार्यकर्ता और अभिनेत्री नफीसा अली होंगी।





परफ्यूम पांच खुशबुओं (चंदन, गुलाब, मोगरा और चमेली) में बाजार में लॉन्च होगा। इतना ही नहीं ब्रांड एंबेस्डर के नाम पर इन पांचों खुशबुओं के परफ्यूम के पहले संस्करण को ‘वाह ओ नफीस’ ब्रांड नेम दिया गया है। केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए अपनी तरह के इस अनूठे संस्थान का उद्घाटन रविवार देर शाम जेल के महानिदेशक अजय कश्यप ने नफीसा अली की मौजूदगी में किया। तिहाड़ केंद्रीय कारागार की जेल नंबर- 07 में आरंभ किया गया यह स्कूल लघु एवं सूक्ष्म औद्योगिक इकाई का आदर्श नमूना है जिसे स्थापित करने एवं संचालित करने में न्यूनतम संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है।

कैदी ही करेंगे उत्पादन इकाई का संचालन

जेल महानिदेशक कश्यप ने कहा कि इस तरह की यूनिट लगाने के लिए काफी कम लागत, छोटी जगह और मामूली मशीनरी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इस स्कूल में न सिर्फ कैदियों द्वारा परफ्यूम और इत्र का उत्पादन होगा बल्कि इसे बनाने की ट्रेनिंग भी कैदियों को दी जाएगी। कश्यप ने बताया कि संस्थान और उत्पादन इकाई का संचालन कैदियों द्वारा ही किया जाएगा। इसमें कैदी कर्मचारियों या श्रमिकों के रूप में नहीं बल्कि संचालनकर्ता के रूप में काम करेंगे, जिससे उनमें उद्यमिता का भी विकास होगा।

परफ्यूम कारोबारियों के राष्ट्रीय संगठन भारतीय परफ्यूम संघ ने तिहाड़ कैदियों द्वारा निर्मित ‘वाह ओ’ ब्रांड को बाजार में बढ़ावा देने में सकारात्मक सहयोग देने की पहल की है। संगठन के सचिव जयदीप गांधी ने इसे कारागार प्रशासन की कारगर पहल बताते हुए संगठन की ओर से इस ब्रांड की मार्केटिंग में भरपूर सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

खुशबुओं के कारोबार को बढ़ाते हुए तिहाड़ जेल इसके दूसरे चरण में रूम फ्रेशनर, अगरबत्ती और खुशबू बिखेरने वाले डिफ्यूसर भी कैदियों द्वारा बनाए जाएंगे। कारोबार का दस फीसदी मुनाफा कैदी कल्याण कोष और 25 फीसदी मुनाफा अपराध पीड़ित कल्याण कोष में दिया जाएगा।

रक्षक न्यूज की राय:

तिहाड़ जेल प्रशासन कैदियों के हुनर और अभिरुचि को ध्यान में रखकर अभिनव पहल करता ही रहता है पर जेल नंबर- 07 में स्कूल ऑफ परफ्यूम एंड फ्रेगरेंस की शुरुआत कर उसने बाजार के अनुभव शुरुआत की है। देश की अन्य जेल प्रशासन को भी इसी तरह की क्रिएटिव पहल करनी चाहिए ताकि वहां भी कैदी बंदी-काल में मनपसंद काम कर देश के उत्पादन में भी हाथ बंटा सकें।

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