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ओवरलोडेड हो रहीं हैं गोरखपुर मंडल की जेलें, शिफ्टों में नींद लेते हैं कैदी

गोरखपुर। गोरखपुर मंडल की जेलों का हाल यह है कि जेलों में बंद कैदी शिफ्टों में दो-दो घंटे की नींद लेने के लिए मजबूर हैं। जेलों में क्षमता से तीन गुना तक बंदी हैं। नतीजन सोने के लिए जगह कम पड़ रही है। परेशान कैदियों ने सोने के लिए खुद ही अपनी शिफ्ट तय कर ली है। ऐसे में जहां दबंग कैदी पूरे छह घंटे की नींद ले रहे हैं। वहीं, कमजोर कैदियों को केवल दो-दो घंटे की शिफ्ट में ही नींद नसीब हो पा रही है।





एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर, बस्ती, देवरिया और महराजगंज जेलों की बैरकों में सभी कैदी एक साथ सोना चाहें तो उनके लिए पर्याप्त जगह ही नहीं बची है। बस्ती और देवरिया की जेलों में नींद ले पाना तो दूर कैदियों को ढंग से बैठने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है।

अधिकारियों के मुताबिक अपराधियों  की गिरफ्तारी की नियमित समीक्षा की वजह से पुलिस सक्रिय हुई है। इसीलिए ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हो रही हैं। पहले से भरी जेलें अब बंदियों के भार वहन करने में असमर्थ हैं। 60 कैदी क्षमता वाली बैरक में 150 तो 30 बंदी क्षमता की बैरक में 80 तक कैदी ठूंसे गए हैं।

खबरों के अनुसार बैरक में एक बंदी के सोने के लिए जितनी जगह निर्धारित की गई है, उसमें तीन बंदियों को समायोजित किया जा रहा है। ऐसे में यदि दो कैदी लेटे हैं तो एक कैदी बैठकर सोने के लिए अपनी बारी का घंटों इंतजार करता है।

चार बैरकों का हो रहा है निर्माण

प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है बंदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार नई बैरकों का निर्माण किया जा रहा है। जिस हिसाब से जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ रही है। यह उनके लिए चार बैरक काफी नहीं हैं। जेलर आर.के. सिंह ने बताया कि 30 बंदियों की क्षमता वाली इन चारों बैरकों का निर्माण पूरा होते ही 120 बंदियों की क्षमता बढ़ जाएगी।

डीआईजी जेल यादवेन्द्र शुक्ला के मुताबिक जेलों में दो से तीन गुना तक कैदी हो गए हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ ही रही है लेकिन जेलों की क्षमता वही पुरानी है। कुछ जेलों पर दो-दो जिलों का भार है, इस वजह से भी बंदियों की संख्या ज्यादा है।

किस जेल की कितनी क्षमता ?

रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर जेल की क्षमता 824 है लेकिन यहां 1721 कैदी हैं। देवरिया जेल में 533 कैदियों को रखने की क्षमता है पर यहां मौजूद कैदियों की संख्या है 1456। बस्ती जेल की क्षमता है 480 जबकि यहां 1305 कैदी रखे गए हैं। इसी तरह महराजगंज  जेल की क्षमता 550 है लेकिन यहां 935 कैदी रखे गए हैं।

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