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ताकतवर देशों से पंगा क्यों ले रहा है चीन ?

बीजिंग। चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत के साथ युद्ध की उलटी गिनती शुरू हो गई है। बड़ी ताकतों को अक्सर इतना अभिमान हो जाता है कि वे दूसरों से टकराव मोल लेने लगती हैं। अमेरिका ने वियतनाम में इस बात का प्रदर्शन किया। उसके पहले हिटलर ने पूरे यूरोप को हड़पने की कोशिश की और उसमें विफलता का मुँह देखा। लगभग ऐसी ही कोशिश अब चीन कर रहा है। खासतौर से उसका मीडिया जिस तरीके से युद्धोन्माद भड़का रहा है, उससे यह बात पुष्ट होती है।





कुछेक साल पहले तक चीन के ज्यादातर विवाद आर्थिक मसलों को लेकर होते थे, पर अब उसके विवाद फौजी विवादों की शक्ल लेते जा रहे हैं। कुछ समय पहले तक ये विवाद छोटे देशों के साथ थे, पर अब उसने ताकतवर देशों से भी पंगा लेना शुरू कर दिया है। इन दिनों उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच चल रही तना-तनी के पीछे भी कहीं न कहीं चीन का हाथ नजर आ रहा है।

चीन ने उत्तर कोरिया को नहीं रोका

पिछले कुछ समय से अमेरिका इस बात का संकेत दे रहा है कि चीन ने अपने मित्र देश उत्तरी कोरिया की नाभिकीय महत्वाकांक्षाओं को रोकने की कोशिश नहीं की। उधर दक्षिण चीन सागर को लेकर हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। अब लगता यह है कि अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाने होंगे।

उधर भारत-चीन सीमा पर डोकलाम के विवाद ने टकराव का रूप ले लिया है। भारत-भूटान और चीन के त्रिसंगम (ट्राई-जंक्शन) पर सड़क बनाने का चीनी दुराग्रह रुकने का नाम नहीं ले रहा है। चीनी नेतृत्व जानबूझकर भारत को भड़काने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत चाहता है कि इस बात का समाधान राजनयिक बातचीत से किया जाए।

रिश्ते बिगड़े तो चीन को भारी नुकसान होगा

भारत-चीन विवाद में युद्ध की संभावना देखने वाला चीनी मीडिया, यह नहीं समझ पा रहा है कि युद्ध से उसकी अर्थ-व्यवस्था को कितना बड़ा धक्का लगेगा। युद्ध होने पर भी 1962 जैसे परिणाम की उम्मीद उसे नहीं करनी चाहिए। भारतीय सेना की तैयारी आज तब से काफी बेहतर है। 1962 में भारत के चीन के साथ व्यावसायिक रिश्ते नहीं थे। आज रिश्ते बिगड़े तो चीन को काफी नुकसान होगा।

चीन ने भारत, जापान और अमेरिका से एकसाथ पंगा लेना शुरू कर दिया है। हाल में चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता में भी काफी कड़वाहट रही। ऐसा लगता है कि चीनी व्यावसायिक संस्थाओं पर अमेरिकी पाबंदियाँ भी लग सकती हैं। भारत के मुकाबले अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़ना चीन की अर्थव्यवस्था के लिए खराब संदेश लेकर आएगा।

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