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अमेरिका में ट्रम्प कब मानेंगे हार

ऱाष्ट्रपति ट्रंप
फाइल फोटो

वाशिंगटन से ललित मोहन बंसल की रिपोर्ट…

डेमोक्रेट जोसेफ़ बाइडन-कमला हैरिस की जोड़ी काँटे की टक्कर में जीत गए हैं। जोई बाइडन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति और भारतवंशी कमला हैरिस पहली अश्वेत उपराष्ट्रपति होंगी। यह एक सच्चाई है, हालाँकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी पराजय को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। प्रथम महिला मेलेनिया ट्रम्प, दामाद एवं सलाहकार जेराड कुश्नेर और बेटी इवानका ट्रम्प ने चुनावी नतीजों को स्वीकारने का मन बना लिया है तो दोनों युवा बेटे डोनाल्ड ज़ू और एरिक सहित ट्रम्प के सिपाहसालार रिपब्लिकन बहुल सिनेट के नेता मिच मेक्नोल, न्यायिक समिति के अध्यक्ष सिनेटर लिंडसे ग्राहम, टेड क्रूज और अन्यान्य अधिवक्ता चुनावी नतीजे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। यों ट्रम्प से नाराज़ चल रहे पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश और ऊटा के सिनेटर मित रोमनी ट्रम्प के दावों से सहमत नहीं है और जोई बाइडन को बधाई दे चुके हैं। यों इस समय बाइडन के पक्ष में घरेलू मीडिया ही नहीं, दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के बधाई संदेशों से ट्रम्प पर दबाव बढ़ता जा रहा है।





शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए 57 वर्ष पूर्व ‘प्रेज़िडेंशियल ट्रांजिशन एक्ट बना था। इस एक्ट के अधीन ‘जीएसए जनरल एडमिनिस्ट्रेटर’ की ज़िम्मेदारी है कि वह मौजूदा एक्ट के अनुसार व्हाइट हाउस में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण और राष्ट्रपति-निर्वाचित के लिए अपेक्षित दस्तावेज़ और सत्ता हस्तांतरण के दिन 20 जनवरी तक की कार्यावधि के लिए आफिस और निर्धारित साठ लाख डालर फ़ंड की व्यवस्था के आदेश दे। यहाँ अड़चन यह आ रही है कि एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति ट्रम्प ने की थी। वह कांग्रेस-प्रतिनिधि सभा और सीनेट के निर्णय की इंतज़ार में हैं। एक दूसरी अड़चन यह है, हालाँकि संयुक्त सेनाओं के चीफ़ जनरल अलेक्जेंडर मार्क मिले ने इस भ्रम को दूर कर दिया है कि तीनों सेनाओं के मुखिया होने के नाते राष्ट्रपति ट्रम्प शांति भंग होने की दिशा में कोई निर्देश देते भी हैं, तो प्रतिकूल परिस्थितियों में वह कांग्रेस के निर्णय की इंतज़ार करेंगे।

अमेरिका में लोकतंत्रीय अध्यक्षीय चुनाव प्रणाली के अंतर्गत 03 नवंबर को हुए फ़ाइनल दौर के मतदान में विजेता को मूलत:

लोकप्रिय मतों से नहीं, 538 इलेक्टोरल मतों में अपेक्षित 270 मत जीतने थे। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन समर्थित राज्यों के अलावा स्विंग स्टेट की मतगणना हुई और काँटे की टक्कर में जोई बाइडन ने (279-214) बढ़त ली, लिबरल मीडिया एपी और सीएनएन ने उन्हें राष्ट्रपति-निर्वाचित घोषित कर दिया। अभी तक की परंपरा भी यही बताई जाती है। यह समय दोपहरपूर्व का था, और ट्रम्प ट्रम्प वर्जीनिया में गोल्फ़ खेल रहे थे। उन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया में कहा, ‘चुनाव अभी ख़त्म नहीं हुए हैं। उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।’ अदालतों में याचिकाएँ दर्ज हुईं, कुछ ख़ारिज हुई, कुछ लंबित हैं। अभी तक राहत नहीं मिली।

लोकतंत्र के दूसरे स्तंभ विधायिका में रिपब्लिकन बहुल सीनेट चुनौती:

अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति कार्यपालिका अर्थात व्हाइट हाउस में सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तो कांग्रेस के ऊपरी सदन सौ सदस्यीय सीनेट में रिपब्लिकन (50-48) है, हालाँकि जार्जिया स्टेट में पांच च जनवरी को पुन: मतदान में रिपब्लिकन के दोनों मौजूदा सिनेटरों के जीतने की उम्मीदें है। सीनेट के समर्थन के बिना राष्ट्रपति ‘अधूरे’ माने जाते हैं। उन्हें वित्त बिल तो दूर, कामकाज के लिए अपने नामित वरिष्ठ निदेशकों और सलाहकारों की टीम की पुष्टि के लिए भी सीनेट की ओर मूँह देखना पड़ता है। बेशक, जोई बाइडन 47 वर्षों की राजनीति के मँजे हुए खिलाड़ी हैं, पर राह इतनी आसान नहीं है। हाँ, निचले सदन-प्रतिनिधि सभा (435) में डेमोक्रेटिक पार्टी (215 ) बहुमत से मात्र तीन सीट दूरी पर है, तो रिपब्लिकन (197) पहले से पाँच सीटें अधिक हैं। मान्य नियमों के अनुसार सीनेट में दोनों ही पार्टियाँ बराबर बराबर रहती हैं, तो ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति का वोट निर्णायक माना जाता है।

ट्रम्प को कोरोना महामारी ले डूबी?:

इस चुनाव में ट्रम्प पराजय का कोई एक मूल कारण ढूँढा जाए तो वह कोरोना महामारी होगा। अमेरिका के ‘उदारवादी’ मीडिया ने कोरोना महामारी और यू एस इकानमी की गिरती साख को चुनाव के अंत तक बड़े मुद्दे बनाए रखा। इस महामारी के लिए 2,33,000 हज़ार अमेरिकी नागरिकों की मौत के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ज़िम्मेदार ठहराया गया। व्हाइट हाउस में सत्तारूढ़ होते हुए ट्रम्प की पिछले 28 वर्षों में यह पहली पराजय है । इससे पहले जार्ज एच डब्ल्यू बुश (1992), ज़िम्मी कार्टर (1980), जे॰फ़ोर्ड (1976) और हरबर्ट हूपर (1932) में एक टर्म के राष्ट्रपति रहे हैं।

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