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ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिका चिंतित

ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल

लॉस एंजेल्स से ललित मोहन बंसल

अमेरिका और ईरान अब खुल कर आमने-सामने खड़े हैं। ईरान ने आणविक हथियारों से लैस मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की पुष्टि कर अमेरिका और यूरोप को आगाह किया है कि उसे प्रतिबंधों की कोई चिंता नहीं है। इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने तीव्र प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि ईरान का मिसाइल परीक्षण का यह क़दम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के विरुद्ध है। इस से क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को ख़तरा पैदा होगा। ईरान के इस क़दम की फ्रांस और इंग्लैंड भी भर्त्सना कर चुके हैं। अमेरिका, फ़्रांस और इंग्लैंड ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाकर ईरान के मिसाइल परीक्षणों की निंदा की और ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की। लेकिन सुरक्षा परिषद की बैठक के 72 घंटों बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक प्रमुख अधिकारी अमीरली हजिजद ने आणविक हथियारों से लैस मध्यम दूरी की मिसाइल के प्रक्षेपण की पुष्टि कर यह जताने की कोशिश कि अफगानिस्तान सहित खाड़ी में अमेरिकी सैनिक अड्डे उनकी मिसाइलों की रेंज में हैं। इतना ही नहीं, हजिजद ने एक बयान में यह बताने की कोशिश की कि पिछले अक्टूबर माह में उनके रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सीरिया में आईएसआईएस पर मिसाइलें दाग़ी थीं, जब आईएसआईएस ने ईरानी टुकड़ी पर हमला करने की ज़िम्मेदारी ली थी। ईरान साल 2006 के पश्चात मिसाइल के विकास पर 500 अरब डॉलर व्यय कर चुका है। इसके अलावा 50 अरब डॉलर मिसाइल प्रक्षेपणों के बुनियादी ढाँचे पर व्यय किए गए हैं।





जर्मन अखबार ‘वेल्ट एम सोंन्तग’ की माने तो ईरान ने 2018 में मध्यम दूरी की दो मिसाइलों सहित सात मिसाइल परीक्षण किए हैं। पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों से एकत्र सुराग़ के आधार पर अख़बार ने यह भी दावा किया है कि ईरान की आणविक हथियारों से लैस मध्यम दूरी की मिसाइल दो हज़ार किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के किसी भी ठिकाने को बर्बाद करने में सक्षम है। इन ठिकानों में इज़राइल सहित खाड़ी में अमेरिका के सैन्य अड्डे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले दिनों ईरान के मिसाइल प्रक्षेपण की गंभीरता के मद्देनज़र ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से सीधे शिखर वार्ता का प्रस्ताव रखा था, तब रूहानी ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इधर मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने भी क्षेत्र में शांति की अपील की है। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2015 में अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ़्रांस और इंग्लैंड सहित पांच देशों के संयुक्त प्रयासों से ईरान के साथ जो आणविक समझौता हुआ था, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। इस समझौते (जेसीपीओए) से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाथ खींच लिए थे। ट्रम्प का कहना था कि यह समझौता न केवल अधूरा है, इसमें ईरान की ओर से विकसित की जाने वाली मिसाइलों पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान टस से मस नहीं हो रहा है। उसकी इकॉनोमी दिनों दिन घ्वस्त होती जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र में एक सौ तीस अरब डालर से तीन सौ अरब डॉलर की नए निवेश की कमी से कच्चे तेल की उत्पादकता को साल 2020 तक बनाए रखने में कठिनाइयाँ आ रही है। युवाओं में बेरोज़गारी चरम पर है। कच्चे तेल के दो बड़े ख़रीदार भारत और चीन ईरान ने द्विपक्षीय व्यापार के बल पर डॉलर को विनिमय राशि से ज़रूर हटा दिया है, पर लोगों को डॉलर के बदले ब्लैक मार्केट में क़रीब चार गुना ज्यादा रियाल देना पड़ रहा है।

ईरान ने बुधवार से दुबई में शुरू अरब स्ट्रेटजी फ़ोरम में मिसाइल प्रक्षेपण के मामले को उठाने और अपेक्षित मदद की गुहार की है। कहा जा रहा है कि ईरान ओपेक देशों के सम्मुख आर्थिक संकट से उपजी दिक्कतें बताकर तेल में कटौती करने से बच गया लेकिन यह फ़ोरम कितनी मदद कर पाएगा कहना मुश्किल है।

 

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