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स्पेशल रिपोर्ट: ताइवान के लड़ाकू विमान क्यों है चौकस ?

ताइवान की प्रधानमंत्री
फाइल फोटो

वाशिंगटन से ललित मोहन बंसल

राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद त्साई इंगवन ने अपने लड़ाकू विमानों को सरहद पर कूच करने के आदेश दे दिए हैं कि अपने देश की सीमाओं की चौकसी में तैनात रहें। इस इऱादे से ताइवान के अमेरिकी निर्मित लड़ाकू विमान एफ-16वी के प्रशिक्षित पायलट देश के दक्षिणी हिस्से में छीययी एयर बेस की ओर रूख कर चुके हैं।





अभी पिछले सप्ताह त्साई इंगवन की जीत से चीनी नेता तिलमिलाए हुए हैं। उन्हें यह पच ही नहीं रहा है कि ताइवानी मतदाताओं को धन जन बल के सभी आश्वासनों के बावजूद उनके समर्थक ताइवान के आम चुनाव में कैसे औंधे मूँह गिरे। दुनिया की दूसरी बड़ी इकानमी के नायक चीन के अख़बारों में सूर्खियों में ताइवान को चेतावनी दी जा रही है कि चीनी मेनलैंड से छिटक कर एक प्रांत और फिर एक देश से राष्ट्र का तानेबाने की कसम खाने वाले देश को अब ज़बरन एकीकृत करने से उन्हें कोई रोक नहीं सकता। ताइवान के दक्षिण तट पर खेत खलिहानो से घिरे समुद्र तट के क़रीब छीययी एयर बेस की पूरी तरह नाकेबंदी कर दी गई है, इस एयर बेस पर उन्नत क़िस्म के रडार, एवीयोनिकस तथा एयर से एयर में मार करने वाली मिसाइलें फ़िट कर दी गई हैं। इन लड़ाकू विमानों के संचालन में वे सब पायलट जुट गए हैं, जिन्हें कभी इन लड़ाकू विमानों को चलाने के लिए अमेरिका के लूक एयर बेस में प्रशिक्षण मिला था। इनमें से एक ले॰कर्नल एन हसीयंग- शेंग एक ऐसे पायलट हैं, जो चीन के एच-6 बम वर्षक और जे-11 लड़ाकू विमानों के रूख मोड़ने में बख़ूबी सफल रहे हैं। कहते हैं: चीन के जे-10 और जे-11 लड़ाकू विमानों से उनके विमान पूरी तरह मैच करते हैं। ताइवान के एफ-16 एस ताइवान खाड़ी के ऊपर कम ऊंचाई पर नियमित उड़ान भरते हैं।

चीनी दबाव के कारण राजनयिक संबंधों की मार झेल रहे ताइवान के सम्मुख अमेरिका ही एकमात्र देश है, जो ‘एक चीन नीति’ के बावजूद सिनो-अमेरिकन म्यूचुअल डिफ़ेंस ट्रीटी 1955-1979 के अंतर्गत रिपब्लिक ऑफ चीन अर्थात ताइवान की सुरक्षा से बंधा हुआ है। ताइवान ने अपने 144 एफ-16 ए बी लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने में लगा है। उसके 15 एफ- 16वीं लड़ाकू विमान आज भी छियवी एयर बेस पर मौजूद हैं। अमेरिका ने पिछले साल जुलाई में ताइवान को दो अरब डालर के मिलिट्री हार्ड वेयर देने पर सहमति जताई थी, जिसमें 108 एम 1 ए 2 टी अब्रम्स टैंक, हरकूलिस सशस्त्र वाहन और एयरक्राफ़्ट भेदी स्ट्रिंगर मिसाइलें थीं। इस प्रस्ताव का त्साई ने स्वागत किया था जबकि कारोबारी जंग से तमतमाए चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। यही नहीं, उन्हीं दिनों त्साई इंगवन के चार दिवसीय न्यू यॉर्क दौरे का भी चीन ने विरोध किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अगले दो तीन वर्षों में इन्हें अपग्रेड कर लिया जाएगा। हां, चीनी नौसेना के पास आधुनिकतम क़िस्म के 24 समुद्री जहाज़ हैं। इनमें 055 और 052 श्रेणी के लेज़र मार्गदर्शित मिसाइल युक्त जहाज़ हैं। इनमें से कुछ को पिछले साल ही लॉन्च किया गया है। बारह हज़ार टन क्षमता वाले 055 श्रेणी के जहाज़ में 122 मिसाइलें दागने क क्षमता है, जबकि श्रेणी 052 जहाज़ क्षमता आठ हज़ार टन है और इसमें 64 लंबवत लॉन्चर छोड़े जा सकते हैं। शी जिन पिंग के सत्तारूढ़ होने के बाद पिछले चार सालों में नौ सेना बेड़े में अमेरिका से अधिक तीन सौ उम्दा लड़ाकू जहाज़ बताए जाते हैं। इसका कारण यह है कि चीन के वियतनाम, फ़िलिपींस और जापान के साथ दशकों पुराने समुद्री विवाद हैं। चीन अत्यधिक व्यस्त दक्षिण चीन सागर पर अपना आधिपत्य जमाता आया है जबकि उसे चुनौती देने वाले देशों में अमेरिका ही एकमात्र देश है, जो इस सागर में चीन की धमकियों के बावजूद बेरोकटोक विचरण करता है।

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