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Special Report: कोरोना के बारे में हमने कुछ नहीं छुपाया- चीन

चीनी सेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। चीन के ऊहान शहर से फैली कोरोना महामारी के बारे में चीन द्वारा पारदर्शिता नहीं बरतने और तथ्यों को छुपाने के आरोपों से चीन ने इनकार किया है। यहां चीनी दूतावास की प्रवक्ता ची रोंग ने कहा है कि चीन सरकार ने हमेशा ही खुला और पारदर्शी रवैया अपनाया है।





चीन ने कहा है कि कोरोना वायरस एक नई किस्म का वायरस है जिसे पहले कभी नहीं देखा गया। प्रवक्ता ने कहा कि यह सही है कि चीन के ऊहान शहर में कोविड-19 के मामले पहली बार उजागर हुए लेकिन यह तो विशेषज्ञ ही बता सकते हैं कि इस वायरस का उद्गम कहां से हुआ। प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में चीन सरकार की स्थिति पूरी तरह साफ है कि इस बारे में विशेषज्ञ लोग ही वैज्ञानिक और तथ्य आधारित पेशेवर आकलन कर सकते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि पहली बार 27 दिसम्बर को हपेई प्रांत के एक डॉक्टर ने कोरोना के कुछ मरीजों के बारे में रिपोर्ट की थी। 29 दिसम्बर को ही संक्रामक रोग की चिकित्सा करने वाले अस्पतालों और शोध केन्द्रों ने संक्रामक रोग के बारे में जांच शुरू कर दी। 30 दिसम्बर को ऊहान नगरपालिका स्वास्थ्य कमेटी ने अज्ञात वजहों से न्यूमोनिया के इलाज की आपात सूचना जारी की। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने एक विशेषज्ञ टीम ऊहान भेजी। तीन जनवरी से ही चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस बारे में जानकारी भेजनी शुरु कर दी। 05 जनवरी को रोग नियंत्रण के चीनी केन्द्र ने नावेल कोरोना वायरस के पांच सम्पूर्ण जिनोम सीक्वेंस वेबसाइट पर अपलोड कर दिये। इसकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी। 23 जनवरी को ऊहान शहर को लाकडाउन में डाल दिया गया। इस महामारी से निपटने के लिये चीन ने कड़े औऱ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिये।

चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से कहा कि चीन सरकार ने यदि महामारी को फैलने से रोकने के लिये कड़े उपाय नहीं किये होते तो ऊहान से बाहर 07 लाख से अधिक कोरोना के मरीज हो जाते। चीन ने कहा है कि सभी देशों का भविष्य आपस में जुडा है और एक दूसरे पर आरोप लगाने और बिना कोई वक्त बर्वाद किये हमें सहयोग की भावना से कोरोना से लड़ने की कार्रवाई करनी होगी। हमें कोरोना वायरस से निपटने के लिये कंधे से कंधा मिलाकर लड़ना होगा।

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