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स्पेशल रिपोर्ट: तिब्बतियों के दमन की अमेरिका ने की निंदा

तिब्बत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। तिब्बतियों के दमन और उनके मानवाधिकारों के हनन की निंदा करते हुए अमेरिका ने तिब्बत के लिये विशेष दूत नियुक्त कर चीन को चिढ़ाया है। तिब्बती मामलों पर तिब्बतियों और चीन के बीच संवाद बनाने के इरादे से अमेरिकी दूत की भूमिका का ऐलान किये जाने पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है।





तिब्बती कोआर्डिनेटर की नियुक्ति का ऐलान करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि उन्हें लोकतंत्र, मानवाधिकार एवं श्रम मामलों के ब्यूरो में सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ए. डेस्ट्रो को तिब्बती मुद्दों पर अमेरिका के विशेष समन्वयक के रूप में समानांतर नियुक्ति की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है।

तिब्बती नीति अधिनियम के अनुरूप, विशेष समन्वयक डेस्ट्रो चीन और दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के अमेरिकी प्रयासों की अगुआई करेंगे; तिब्बतियों की अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान का संरक्षण करेंगे; और उनके मानवाधिकारों का सम्मान किए जाने के लिए दबाव बनाएंगे। वह तिब्बती शरणार्थियों की मानवीय सहायता ज़रूरतों को पूरा करने और तिब्बती पठार के स्थानीय समुदायों में सतत आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के अमेरिकी प्रयासों में भी योगदान देंगे।

अमेरिका चीन द्वारा तिब्बती समुदाय के दमन को लेकर चिंतित है, जिसमें सार्थक स्वायत्तता का अभाव, तिब्बती इलाक़ों में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और चीन के भीतर तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक परंपराओं पर गंभीर पाबंदियों के मुद्दे शामिल हैं।

विशेष समन्वयक डेस्ट्रो इन मुद्दों के समाधान के लिए तिब्बती नेताओं तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे। वह दुनिया भर में तिब्बती प्रवासियों, तथा धर्म या आस्था की स्वतंत्रता समेत विभिन्न मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए आवाज़ उठाने वाले उनके साहसी कार्यकर्ताओं से विदेश विभाग के जुड़ाव और समर्थन को भी आगे बढ़ाएंगे।

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