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Special Report: अमेरिकी राजदूत ने किया अरूणाचल का दौरा

अमेरिकी राजदूत केन जस्टर
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। अरूणाचल प्रदेश के जिस तवांग शहर को चीन अपना इलाका बताता है वहां अमेरिकी राजदूत केन जस्टर ने दौरा कर चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद पर भारत को नैतिक समर्थन दिया है।





राजदूत केन जस्टर अरूणाचल प्रदेश सरकार के निमंत्रण पर तवांग पर्व में मुख्य अतिथि के तौर पर तवांग गए थे। इस दौरे के बाद अमेरिकी राजदूत ने अपने ट्वीट संदेश में लिखा-  तवांग पर्व में  मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लेने पर काफी अच्छा लग रहा है। उन्होंने लिखा- भारत और अमेरिका की दोस्ती।

एक अन्य ट्वीट में राजदूत जस्टर ने  मुख्यमंत्री पेमा खांडू और केन्द्रीय राज्य मंत्री किरण रिजेजू को धन्यवाद दिया। उन्होंने अरूणाचल प्रदेश में उनके औऱ उनको सहयोगियों के जोशीले स्वागत के  लिये दोनों को धन्यवाद दिया औऱ फिर कहा: अमेरिका-भारत दोस्ती।

इसके साथ ही  धार्मिक आजादी के लिये  अमेरिकी राजदूत  सैमुअल डी ब्राउनबैक ने तिब्बती निर्वासित सरकार के  मुख्यालय धर्मशाला जा कर  तिब्बती धर्णगुरु दलाई लामा से 28 अक्टूबर को मुलाकात की।  तिब्बत के केन्द्रीय प्रशासन (सीटीए)  ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी राजदूत और उनके शिष्टमंडल ने धर्मशाला में दलाई लामा के निवास पर उनसे मुलाकात की।

गौरतलब है कि तवांग का अमेरिकी राजदूतों ने पहले भी दौरा किया है। लेकिन अरूणाचल प्रदेश के आधिकारिक निमंत्रण पर अमेरिकी राजदूत का तवांग जाना  काफी अहमियत रखता है।

गौरतलब है कि चीन  अरूणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का इलाका बताता है और पूरे प्रदेश पर अपना अधिकार जताता है। भारत-चीन सीमा बातचीत में तवांग एक सौदेबाजी का एक अहम इलाका बना हुआ है। तवांग में तिब्बत का दूसरा सबसे अहम मठ है जिसकी अहमियत तिब्बती राजधानी ल्हासा के बाद दूसरे स्थान पर होने का दावा करता है और इस नाते वह तवांग को तिब्बत में विलय करने की बात करता है।

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