International

स्पेशल रिपोर्ट: ट्रम्प की मध्य-पूर्व शांति योजना में एक तीर से दो शिकार !

ऱाष्ट्रपति ट्रंप
फाइल फोटो

वाशिंगटन से ललित मोहन बंसल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीनेट में डेमोक्रेट की ओर से चलाए जा रहे महाभियोग के बीच एक तीर से दो शिकार करने का जोखिम उठाया है। उन्होंने अपनी मध्य-पूर्व विदेश नीति में बहुप्रतिक्षित शांति योजना प्रेषित कर जहाँ डेमोक्रेट को उलटे पाँव खड़ा करने का जोखिम उठाया है, वहीं अरब लीग और इस्लामिक देशों के पारस्परिक संघर्ष का लाभ उठाने की कोशिश की है। इसमें फ़िलिस्तीन और उसके चहेते मददगार देशों- ईरान, चीन, रूस और लेबनान, सीरिया आदि देशों ने शांति प्रस्तावों पर अभी तक कोई बड़ा हो-हल्ला नहीं किया है।





यूं कहें कि भारत ने शांति प्रस्तावों पर एक मित्र देश के रूप में ट्रम्प की पीठ थपथपाई है, तो ग़लत नहीं होगा। विदेश मंतालय में प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्रम्प के ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ के आधार पर इज़राइल और फ़िलिस्तीन को यह सलाह दी है कि बातचीत से मौजूदा समस्याओं का निदान करें। असल में ज़मीनी हक़ीक़त भी यही है।

यहाँ भारत ने अपनी मध्यपूर्व की नीति में इज़राइल-फ़िलिस्तीन के बीच साल 1967 युद्ध से पूर्व दो देशों के बीच सीमाओं, पूर्वी यरुशलम को फ़िलिस्तीन की राजधानी बनाए जाने और पश्चिमी तट पर फ़िलिस्तीन के भू क्षेत्र में इज़राइल की अवैध बस्तियों के बारे में टिप्पणी करने से परहेज़ किया है। फ़िलिस्तीन को इस बात का कष्ट है कि ट्रम्प की शांति योजना एक दम से छलावा है। अब फ़िलिस्तीन अपना दुखड़ा इस्लामिक देशों और अरब लीग से ना करे, तो किस से करे? फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने त्वरित प्रतिक्रिया में कह तो दिया कि उन्हें हज़ार बार भी कहा जाएगा, तो उनका जवाब ना होगा।

संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरे बड़े संगठन 57 देशों के इस्लामिक देशों का शिखर सम्मेलन शुक्रवार को मक्का, सऊदी अरब में हो रहा है तो 22 देशों की अरब लीग के विदेश मंत्री सोमवार को काहिरा में मिल रहे हैं। इन में पाकिस्तान कश्मीर और फ़िलिस्तीन ‘पूर्वी यरुशलम’ के छिटकने पर हो हल्ला करेंगे। यूं कहें, मुस्लिम और अरब देश अपनी घरेलू समस्याओं में इतने उलझे हुए हैं कि वे ट्रम्प के रहते हुए इज़राइल से सीधे मूँह भिड़ना ही नहीं चाहते। खाड़ी में फ़िलिस्तीन का एकमात्र मददगार ईरान अपने कुद्स कमांडर की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत और यूक्रेन के एक यात्री विमान को गिराए जाने के बाद घरेलू विरोध से जूझ रहा है। यूरोपीय समुदाय ने ट्रम्प शांति योजना का कमोबेश स्वागत किया तो रूस ने कहा कि वे प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद ही अपनी राय देंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अँटोनियो गुतेरस की ओर से उनके प्रवक्ता ने भी सलाह दे डाली कि ‘ज़मीनी हक़ीक़त’ को देखते हुए फ़िलिस्तीन को शांति प्रस्तावों पर ग़ौर कर लेना चाहिए।

अब देखें, ट्रम्प ने इस ‘शताब्दी शांति-समझौते’ में 181 पृष्ठों में फ़िलिस्तीन को कहा है कि पूर्वी यरुशलम की जगह वह ‘अबू दिस’ अथवा ‘अल कुद्स’ ले ले, जो पूर्वी यरुशलम की म्यूनिसिपल सीमा से बाहर एक गाँव में सीमित है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अल कुद्स के इर्द गिर्द के कुछ इलाक़ों को भी नई राजधानी में शामिल किया जा सकता है। यही नहीं, यह पवित्र यरुशलम शहर से पृथक है और इसके बीच एक दीवार है, जो यहूदी इलाक़े को अलग रखती है। हाँ, यरुशलम के उस पवित्र परिसर में स्थित दो मस्जिदों में से एक अल अक्स मस्जिद के बारे में यथा स्थिति बनाए रखने और उसमें मुस्लिम समुदाय को बेरोक टोक जाने के लिए ज़रूर अनुमति दी गई है। असल में ट्रम्प एकीकृत यरुशलम की अवधारणा के साथ पश्चमी यरुशलम को इज़राइल की राजधानी मान कर अपना दूतावास भी तेल अवीव से हटा कर यरुशलम ले जा चुके हैं। इस पर फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से गुहार लगाई है और कहा है कि वे इस योजना को सिरे से ख़ारिज करना चाहते हैं। इस शताब्दी शांति योजना पर इज़राइल प्रसन्न है. इज़राइल की प्रसन्नता में यूरोपीय समुदाय ने भी समर्थन जता दिया है।

Comments

Most Popular

To Top