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स्पेशल रिपोर्ट: तुर्की का फैसला भारत के लिये प्रेरणा

एस- 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम
फाइल फोटो

नई दिल्ली। अमेरिकी अगुवाई वाले पश्चिमी सैन्य संगठन नाटो (उत्तर अतलांटिक संधि संगठन) के सदस्य तुर्की ने रूस से एस-400 एंटी मिसाइल रक्षा प्रणाली नहीं खरीदने के अमेरिकी दबाव की परवाह नहीं की है और वह जुलाई से ही इस एंटी मिसाइल प्रणाली को अपनी धरती पर तैनात कर देगा।





गौरतलब है कि भारत ने भी रूस से एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली रूस से खरीदने का सौदा किया है। ऐसी पांच मिसाइल प्रणाली खरीदने का यह सौदा सवा पांच अरब डालर में हुआ है। अमेरिका ने भारत से धमकी भरे स्वर में कहा है कि वह रूस से यह मिसाइल प्रणाली खरीदेगा तो उस पर अमेरिकी कानून कैटसा (काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट) के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाएगा। इस कानून में प्रावधान है कि रूस से जो भी देश कोई सैन्य हथियार खरीदेगा तो अमेरिका उस देश पर पाबंदी लगाएगा। हालांकि भारत ने खुलकर कभी भी यह नहीं कहा है कि वह अमेरिकी कैटसा कानून को नहीं मानता है लेकिन भारत इस सौदे पर आगे बढ़ रहा है और इसे भारत में तैनात करने के लिये कदम उठाए जाने लगे हैं। यह मिसाइल भारत में दो साल बाद राजधानी नई दिल्ली और मुम्बई जैसे शहरों की सुरक्षा के लिये तैनात की जानी है। यह मिसाइल करीब चार सौ किलोमीटर दूर से आ रही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को आसमान में ही ध्वस्त कर सकती है।

अमेरिका भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह रूसी एंटी मिसाइल प्रणाली खरीदने के बदले अमेरिकी थाड या पैट्रियट- 3 मिसाइल रक्षा प्रणाली हासिल करे। लेकिन भारत ने कहा है कि वह रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली हासिल करने के लिये पिछले कुछ सालों से सौदेबाजी कर रहा था और तब अमेरिका ने कैटसा कानून नहीं बनाया था।

रोचक बात यह है कि तुर्की नाटो का सदस्य होते हुए अमेरिका की धमकी नहीं मान रहा है। अमरिका ने तुर्की से कहा है कि वह तुर्की को  जो लड़ाकू विमान बेचने वाला है उसका सौदा रद्द कर देगा। लेकिन तुर्की अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं  झुक रहा है। यहां सामरिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि तुर्की का अपने फैसले पर अड़ा रहना भारत के लिये काफी उत्साहजनक है। भारत भी तुर्की से प्रेरणा ले कर रुस से एस-400 मिसाइल प्रणाली का सौदा निःसंकोच जारी रख सकता है।

अमेरिका का तर्क है कि भारत चूंकि अमेरिकी सैन्य प्रणालियां हासिल कर रहा है इसलिये उसका  भारतीय सेनाओं में रूसी सैन्य् प्रणालियों के साथ सामंजस्य नहीं बैठ सकता।

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