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Special Report: दोनों कोरियाई देशों का विसैन्यीकृत इलाका शांत रहता है

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन
फाइल फोटो

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया को विभाजित करने वाला विसैन्यीकृत इलाका (डिमिलिट्राइज्ड जोन- DMZ) दोनों कोरियाइयों के बीच शांति स्थापित करने का एक अहम इलाका है। कोरिया के ग्योंगी- डो प्रांत में स्थित यह विसैन्यीकृत इलाका रोजाना दुनिया के हजारों पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।





ग्योंगी- डो प्रांत के गवर्नर ली- जाए-म्युंग ने बताया कि कहने को यह इलाका दोनों कोरियाइयों को बांटता है लेकिन यह इलाका दक्षिण कोरिया का दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक इलाका है जहां के औद्योगिक माहौल से आकर्षित होकर पिछले साल कोई 25 हजार कम्पनियों ने अपना पंजीकरण करवाया। दक्षिण कोरिया के दूसरे औद्योगिक शहर सुवोन सिटी ने तो भारत के हैदराबाद शहर के साथ सिस्टर सिटी का रिश्ता बना कर भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक व व्यावसायिक रिश्तों को नई गति दी है।

वैसे तो उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम की तानाशाही नीतियों की वजह से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच हमेशा तनाव बना रहता है लेकिन ग्योंगी-डो में औद्योगिक, पर्यटन और प्राचीन धरोहरों की वजह से यह दक्षिण कोरिया के सबसे जीवंत इलाके के तौर पर उभर चुका है। ग्योंगी- डो इलाके में घुसपैठ की तीसरी सुरंग पर्यटकों को सर्वाधिक आकर्षित करती है जहां से उत्तर कोरिया के प्रताडित नागरिक भाग कर दक्षिण कोरिया में पलायन करने की कोशिश करते रहे हैं। इस इलाके में मौजूद डोरा आब्जर्वेटरी भी पर्यटकों को खींचती है।

ग्योंगी- डो प्रांत का दुनिया के 16 अन्य इलाकों और शहरों से विशेष रिश्ता बन चुका है। ग्योंगी- डो प्रांत दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल के आसपास का इलाका है और 13 लाख की आबादी के साथ दक्षिण कोरिया का सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है। ग्योंगी- डो प्रांत का ईसा पूर्व 18 वीं सदी से गौरवशाली इतिहास रहा है जब यह तीन देशों में विभाजित था और आज भी यह इलाका दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था औऱ तकनीक के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस इलाके में रसायन, इलेक्ट्रानिक्स, मशीनरी के कारखानों की भरमार है और दक्षिण कोरिया के एक चौथाई उद्योग इसी इलाके में स्थित हैं।

दक्षिण कोरिया का यह विसैन्यीकृत इलाका (DMZ) न केवल लोकप्रिय आकर्षण है बल्कि अपनी औद्योगिक गतिविधियों की वजह से यह इलाका दुनिया के व्यावसायिकों के लिये भी आकर्षण का गढ़ बन चुका है। उत्तर पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थओं के विकास की वजह से ग्योंगी- डो इलाके की अहमियत बढ़ती जा रही है।

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