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स्पेशल रिपोर्ट: करतारपुर गलियारा मामले में सुरक्षा पर सर्वोच्च ध्यान

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा
फाइल फोटो

नई दिल्ली। गुरु नानक देव गुरुद्वारा के दर्शन के लिये भारत पाक सीमा पर बन रहे करतारपुर साहिब गलियारा पर भारत की ओर से तेज गति से काम चल रहा है लेकिन भारतीय अधिकारियों की मुख्य चिंता सुरक्षा मसलों को लेकर है। अटारी-वाघा सीमा पर 14 जुलाई को होने वाली बैठक में जहां पाकिस्तान की ओर से किये जाने वाले जरूरी ढांचागत निर्माण के बारे में भी चर्चा की जाएगी भारतीय अधिकारी खालिस्तान को लेकर भारत की चिंता के सम्बन्ध में जरूरी मुद्दे उठाएंगे।





यहां विदेश और गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि भारत की ओर से सुरक्षा मसलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। करतारपुर गुरुद्वारा जाने वाले तीर्थयात्रियों को कहीं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी बहका कर अपने यहां नहीं ले जाएं इसे सुनिश्चित करने के लिये भारतीय अधिकारी सचेत हैं। भारतीय अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि करतारपुर साहेब गलियारा की प्रबंध समिति में खालिस्तानी तत्व नहीं शामिल किये जाएं।

भारत की पूरी कोशिश है कि नवम्बर में गुरु नानक देव की 550वीं सालगिरह के पहले ही 31 अक्टूबर तक सभी जरूरी निर्माण पूरे हो जाएं। इसके लिये भारत की ओर से 60 प्रतिशत काम पूरे हो चुका है। इस पूरी परियोजना पर 500 करोड़ रुपये का निवेश भारत की ओर से किया जा रहा है जिसमें हवाई अड्डे जैसा पसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग होगा। इस भवन में 52 आव्रजन काउंटर होंगे। इस टर्मिनल को 58 एक़ड में बनाया जा रहा है जिसमें 500 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। नेशनल हाईवे 354 तक करतारपुर गलियारा के शुरुआत से चार लेन का एक हाईवे के निर्माण पर काम काफी तेजी से चल रहा है।

इस इमारत से होकर रोजाना पांच हजार तीर्थयात्रियों के आने जाने की व्यवस्था होगी। लेकिन खास त्यौहारों पर दस हजार तीर्थयात्रियों के आने जाने का पूरा ख्याल रखा जाएगा। यात्रियों को पाकिस्तानी इलाके में ठहरने की व्यवस्था नहीं होगी। उन्हें सुबह जा कर शाम तक लौटना होगा।

पाकिस्तान द्वारा तीर्थय़ात्रियों से वीजा शुल्क वसूलने के प्रस्ताव का भारत विरोध करेगा। 14 जुलाई को होने वाली बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि तीर्थ यात्रियों के पास कैसे यात्रा दस्तावेज होने चाहिये।

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