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स्पेशल रिपोर्ट: 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने पर पोम्पियो ने किया शोक जाहिर

यूएस विदेश मंत्री पोम्पियो
फाइल फोटो

नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने गत 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ भिडंत में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने पर गहरा शोक जाहिर किया है।





यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल के इंडिया आईडियाज समिट को सम्बोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने चीनी सेना द्वारा पूर्वी लद्दाख में हाल की झड़पों की ओर इशारा करते हुए कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अस्वीकार्य व्यवहार की यह नवीनतम मिसाल है। विदेश मंत्री ने 20 भारतीय सैनिकों की मृत्यु पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और अपने पड़ोसियों के प्रति चीन के बढ़ते आक्रामक रुख से निपटने के लिए लोकतंत्रों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया में सबसे पुराने और सबसे अधिक जनसंख्या वाले लोकतंत्र हैं। दोनों देश ‘‘स्वतंत्रता की आवाज, कानून के शासन, और मानव अधिकारों के प्रति गहरी श्रद्धा को साझा करते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत कुछ विश्वसनीय, समान विचारधारा वाले देशों में से एक है जो सभी वैश्विक मामलों पर अमेरिका का सहयोग करता है। उन्होंने अमेरिका-भारत व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तीन उल्लेखनीय पहलुओं को रेखांकित किया और उन तरीकों का पूर्वावलोकन किया जिससे हमारे संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं।

पोम्पियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका और भारत को हमारे देशों, क्षेत्र और दुनिया की चुनौतियों की साझा समझ पहले से कहीं अधिक है। पोम्पियो ने कहा कि चुनौतियों की व्यापकता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा उत्पन्न की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी आधारभूत परियोजनाएं, हमारी आपूर्ति श्रृंखलाएं, हमारी संप्रभुता और हमारे लोगों का स्वास्थ्य और सुरक्षा, खतरे में हैं।’’

पोम्पियो ने बहुपक्षीय कूटनीति में भारत की साझेदारी का स्वागत किया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है। विदेश मंत्री ने विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के चुनाव पर अमेरिका और भारत के मिलकर कार्य करने की प्रशंसा की। भारत और अमेरिका ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि संगठन के नए महानिदेशक बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्मान करेंगे, और अमेरिका ने इस पद पर श्री डैरन तांग के चुनाव का स्वागत किया।

पोम्पियो ने बहुपक्षीय कूटनीति में भारत के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत ने जापान और आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चर्तुपक्षीय समूह को पुनर्जीवित किया है। सेक्रेटरी ने समान विचारधारा वाले देशों के समूह में भारत की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला, जिसे वह साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए नियमित रूप से बुलाते हैं।

भविष्य को देखते हुए पोम्पियो ने अगली जी -7 बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया है। सेक्रेटरी ने देशों और संगठनों के समूह जो साझा मूल्यों के आधार पर हमारे प्राकृतिक साझेदार हैं उनकी आर्थिक समृद्धि नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका और भारत के लिए जी-7 की प्राथमिकता का पूर्वावलोकन किया।

पोम्पियो ने भारत से अमेरिका के साथ और भी अधिक निकटता से काम करने के अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। यह देखते हुए कि दुनिया कोविड-19 महामारी से उबरने के लिये सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहती है, पोम्पियो ने कहा कि भारत के पास दूरसंचार और चिकित्सा आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में चीनी कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करने का अवसर है।

जैसा कि भारतीय नीति-निर्माताओं ने अपने सप्लाई चेन को पुन: परिभाषित किया है, माइक पोम्पियो ने भारत से हाल के इतिहास और मुक्त बाजारों की शक्ति को ‘‘गरीबी से लोगों को बाहर निकालने के सबसे अच्छे तरीके’’ के रूप में याद रखने का आग्रह किया। विदेश मंत्री ने ब्लू डॉट नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने हेतु भारत को आमंत्रित किया, जो उच्च गुणवत्ता वाले, पारदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने की एक योजना है। आर्थिक सुधार में निजी क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उबरने वाले देशों के रूप में यह योजना ‘‘महत्वपूर्ण’’ है। सेक्रेटरी ने भारत को व्यापार निवेश बढ़ाने के लिए अधिक खुला वातावरण बनाने को प्रोत्साहित किया।

माइक पोम्पियो ने अपने सम्बोधन में ‘कठोर परिश्रम और उद्यमशीलता की भावना पर प्रकाश डाला जिसे भारतीय और अमेरिकी साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि हम इस मौजूदा चुनौती से उभरें पहले से अधिक लचीलापन और नवप्रवर्तन लाएं। और दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के बीच सहयोग गहरा करने के लिए इस पल को थाम लें।

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