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स्पेशल रिपोर्ट: अंडमान सागर में अमेरिकी पोतों के साथ युद्धाभ्यास

युद्धाभ्यास
फाइल फोटो

नई दिल्ली। चीन को एक अहम सामरिक संदेश देने वाला कदम उठाते हुए भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस निमित्ज की अगुवाई में अमेरिकी युद्धपोतों के साथ सोमवार को पैसेज अभ्यास किया।





चीन और भारत के बीच चल रहे मौजूदा सैन्य तनावों के बीच भारत और अमेरिका के नौसैनिक पोतों द्वारा अंडमान सागर में यह साझा पैसेज युद्धाभ्यास करना काफी अहम सामरिक संकेत माना जा रहा है।

गौरतलब है कि अमेरिकी विमानवाहक पोत परमाणु बिजली से संचालित है और इसने पिछले सप्ताह ही दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक अभ्यास किया है जिस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। यूएसएस निमित्ज की अगुवाई में कई और अमेरिकी युद्धपोतों ने मलक्का जलडमरूमध्य से होते हुए अंडमान सागर में गत शनिवार को ही प्रवेश किया था।

गौरतलब है कि अमेरिकी विमानवाहक पोत निमित्ज ने अपने साथी विमानवाहक पोत रेगन के साथ दक्षिण चीन सागर में अन्य सहयोगी युद्धपोतों के साथ साझा युद्धाभ्यास कर चीन को यह संदेश दिया था कि दक्षिण चीन सागर अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाका है जहां दुनिया के किसी भी पोत की आवाजाही पर किसी तरह की रोकटोक नहीं लगाई जा सकती। अमेरिकी विमानवाहक पोत पर 80 से 90 लडाकू विमान तैनात रहते हैं।

साझा पैसेज अभ्यास में भारतीय नौसेन की ओर से कई बडे युद्धपोतों ने भाग लिया जिसमें विध्वंसक पोत, फ्रिगेट, पनडुब्बियां और समुद्री टोही विमानों ने भाग लिया। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से पूर्वी नौसैनिक कमांड के कमांडर रियर एडमिरल संजय वातसायन ने अगुवाई की।

गौरतलब है कि पिछले महीने के अंत मं मलक्का जलटडमरु मध्य के निकट ही भारत और जापान के नौसैनिक पोतों ने साझा युद्धाभ्यास किया था।

भारत और अमेरिकी नौसेनाएं मालाबार साझा नौसैनिक अभ्यास के तहत 1992 से ही दिवपक्षीय अभ्यास करती रही हैं औऱ पिछले दशक से इसमें जापान को भी शामिल किया जाने लगा है। इस साल के मालाबार अभ्यास में आस्ट्रेलिया को भी शामिल करने की हरी झंडी भारत ने दी है।

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