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Special Report: कोरिया की दक्षिण नीति में भारत को विशेष स्थान

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए-इन
फाइल फोटो

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि उसकी दक्षिण नीति में भारत को विशेष अहमियत दी गई है और इस नीति का भारत की एक्ट ईस्ट नीति के साथ अच्छा तालमेल बन चुका है। भारत औऱ दक्षिण कोरिया के बीच विशेष सामरिक साझेदारी का रिश्ता बताते हुए कोरिया के आला नीति निर्माता शिन वांग कील ने यहां  विचार संस्था आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक बैठक में कहा कि  भारत और दक्षिण कोरिया के बीच दिवपक्षीय रिश्तों में भारी प्रगति हुई है।





गौरतलब है कि कोरियाई रक्षा कम्पनी से हाल में ही भारतीय थलसेना के लिये वज्र तोपों का सौदा हुआ था जिसकी पहली खेप की सप्लाई पिछले साल नवम्बर में की गई थी।

कोरियाई रक्षा कम्पनियों के अलावा दक्षिण कोरिया के उपभोक्ता इलेक्ट्रानिक्स उदयोग ने भारत में भारी निवेश किये हैं लेकिन दोनों के बीच  आपसी व्यापार केवल 22 अऱब डॉलर के स्तर तक हीं पहुंच सका है जब कि दक्षिण कोरिया और चीन के बीच आपसी व्यापार 250 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

इसी के मद्देनजर कोरियाई  राजनयिक ने कहा कि भारत औऱ कोरिया को आपसी सम्बन्धो को औऱ गहरा करने के लिये सामरिक एजेंडा तैयार करना होगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पिछले कोरिया दौरे में दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी के रिश्तों को नई ऊंचाई  पर  पहुंचाने पर जोर दिया था।  कोरियाई राष्ट्रपति मून  जाए-इन भारत के साथ सामरिक रिश्तों को औऱ गहरा बनाने पर जोर दे रहे हैं। उन्होने कहाकि दोनों देश हिंद प्रशांत इलाके मे शांति व स्थिरता  के लिये मिलकर काम कर सकते हैं। दोनों देश एक शांत, स्थिर,  खुली आवजाही वाले समुद्री ढांचे में विश्वास करते हैं इसलिये  दोनों देश एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहाकि  राषट्रपति मून ने नई दक्षिण नीति तैयार की जिसमें दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ  गहरे सम्प्रर्क बनाने के अलावा विशेष तौर पर भारत के साथ सामरिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। गौरतलब हैकि दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ शांतिपूर्ण परमाणु समझौता काफी पहले सम्पन्न किया है औऱ इसके तहत उसने भारत में परमाणु बिजली घर लगाने की भी पेशकश की थी।

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