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स्पेशल रिपोर्ट: भारत-अमेरिका ने कहा- आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त लड़ाई की जरूरत

पीएम मोदी और ट्रंप
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने छद्म संगठनों के  जरिये आतंकवाद के इस्तेमाल की नीति की भर्त्सना की ही और कहा है कि अलकायदा, आइसिस , लश्कर ए तोयबा, जैश ए मुहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन सहित सभी आतंकवादी संगठों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरुरत है।





दोनों देशों ने यह  राय  भारत अमेरिका प्रतिआतंकवाद संयुक्त कार्यदल की 17 वीं बैठक तथा यूएस-इंडिया डेज़िगनेशंस डायलॉग के  तीसरे  सत्र की  9-10 सितंबर  को आयोजित  बैठक में जाहिर की । भारतीय विदेश मंत्रालय में काउंटर टेररिज़्म मामलों के संयुक्त सचिव महावीर सिंघवी और अमेरिकी विदेश विभाग के काउंटर टेररिज़्म के समन्वयक राजदूत नैथन ए. सेल्स ने आतंकवाद निरोधक सहयोग पर दूरगामी महत्व की इस बातचीत में अपने-अपने देशों के अंतर-एजेंसी/अंतर-विभागीय शिष्टमंडलों का नेतृत्व कियातथा दोनों देशों की मौजूदा व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी के इस अहम घटक के बारे में निकट समन्वय जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने छद्म संगठनों के ज़रिए आतंकवाद के इस्तेमाल की भर्त्सना की और सभी स्वरूपों में सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्तराष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों द्वारा पेश ख़तरों पर विचार-विमर्श किया । दोनों पक्षों नेविशेषकर भारत में हाल में हुए क़ानूनी बदलावों के मद्देनज़रआतंकवादी गुटों और व्यक्तियों के खिलाफ़ प्रतिबंधों और उन्हें प्रतिबंधों के लिए नामित किए जाने के संबंध में अपनी प्राथमिकताओं और प्रक्रियाओं पर भी जानकारियां साझा की।

दोनों पक्षों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पाकिस्तान को यह सुनिश्चत करने के लिए तत्कालसतत और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करने की ज़रूरत है कि उसके अधीन कोई भी इलाक़ा आतंकवादी हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं होऔर वह ऐसे हमलों में शामिल व्यक्तियों को शीघ्रता से न्याय के कटघरे में लाएजिनमें मुंबई का 26/11 हमला और पठानकोट हमला शामिल हैं। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई में भारत की जनता और सरकार को अपने समर्थन की बात दोहराई।

संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2396 में वर्णित महत्वपूर्ण प्रावधानों और दायित्वों के अनुरूप सूचनाएं साझा करने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की यात्रा करने की क्षमता को बाधित करने के अन्य उपायों को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों पक्षों ने प्रतिबद्धता जताई।  बैठक में दुनिया की कतिपय अहम आतंकवाद निरोधक चुनौतियों के मुक़ाबले के अपने प्रयासों की भी चर्चा हुई जिनमें आतंकवादी संगठनों के वित्तीय और संचालन तंत्र को बाधित करनेकट्टरपंथ और आतंकवाद के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल पर रोक लगानेआतंकवादियों की सीमापार आवाजाही को बंद करनेतथा वापस आने वाले आतंकवादी लड़ाकों और उनके परिजनों पर मुक़दमे चलानेउनका पुनर्वास करने और उन्हें फिर से समाज से जोड़ने के विषय शामिल थे। दोनों पक्षों ने परस्पर क़ानूनी एवं प्रत्यर्पण सहायताद्विपक्षीय क़ानून प्रवर्तन प्रशिक्षण और सहयोग की भी चर्चा की।

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