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Special Report: जनवरी से भारत सुरक्षा परिषद में !

यूएन में भारत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सुरक्षा परिषद के गैर स्थायी सदस्य के तौर पर 17 जून को होने वाले चुनाव में भारत को सफलता मिलने की उम्मीद है। एशिया प्रशांत समूह से भारत अकेला नामजद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में भाग ले रहा है। इस नाते भारत को उम्मीद है कि अस्थायी सदस्यता के लिये वह निर्वाचित हो जाएगा।





इस अस्थायी सदस्यता के लिये भारत की प्राथमिकताएं बताने वाला एक ब्रोशर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यहां जारी किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिये यह आठवां कार्यकाल होगा। भारत का कार्यकाल जनवरी, 2021 से शुरू होगा।

विदेश मंत्री ने अपनी टिप्पणियों में अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिये सुरक्षा परिषद द्वारा सामना किये जा रहे अंतरराष्ट्रीय मसलों का जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि मौजुदा कोविड-19 महामारी की वजह से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक माहौल और जटिल हुआ है। इस वजह से स्थानीय , क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने में देशों की क्षमताएं सीमित हो गई हैं।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत दीर्घकाल से उदारता का प्रतिनिधित्व करता रहा है, बातचीत का प्रतिपादक रहा है और अंतरराष्ट्रीय कानून का प्रचारक रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों में भारत सैद्धांतिक रवैया अपनाता रहा है। सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर चुने जाने के बाद भारत का विदेश नीति कार्यालय इस नजरिये से सुरक्षा परिषद के समक्ष अपना प्रतिवेदन रखेगा ।

भारत के लिये जो मुख्य प्राथमिकताएं हैं उसका खुलासा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि ये इस प्रकार हैं- 1. प्रगति के लिये नये अवसर, 2. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का प्रभावी जवाब, 3. बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, 4. अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिये एक समग्र रवैया 5. मानवीय संवेदनाओं के साथ तकनीक का संवर्द्धन ।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का उक्त रवैया पांच एस (S) से निर्देशित होगा। यह है

1. सम्मान, 2. संवाद, 3. सहयोग, 4. शांति, 5. समृद्धि

विदेश मंत्री ने कहा कि सुरक्षा परिषद में दो साल के कार्यकाल में भारत का मुख्य जोर सुधरी हुई बहुपक्षीय व्यवस्था को हासिल करने पर रहेगा।

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