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स्पेशल रिपोर्ट: विदेश मंत्री वार्ता के बाद गहन मंथन

विदेश मंत्री मास्को में

नई दिल्ली। गुरुवार रात को मास्को में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता में कोई दिखावटी प्रगति न होने के बाद यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आला सुरक्षा अधिकारियों के साथ पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों की गहन समीक्षा की है। विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद चुशुल इलाके में शुक्रवार को ब्रिगेड कमांडरों की बैठक भी हुई।





इस बैठक में तीनों सेनाओं के प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत , रक्षा सचिव अजय कुमार , तीनों सेनाओं के प्रमुख औऱ अन्य आला सैन्य कमांडर मौजूद थे। गौरतलब है कि गुरुवार को विदेश मंत्रियों की पहली आमने सामने की वार्ता के बाद दोनों देशों ने 05 बिंदुओं वाला एक साझा बयान जारी किया है जिसमें तनाव घटाने के लिये दोनों देशों ने सहमति दी है और भ़डकाने वाली कार्रवाई नहीं करने के साथ एक दूसरे पर भरोसा पैदा करने वाले समझौतों का पालन करने पर जोर दिया है। साझा बयान में कहा गया है कि दोनों देश अपने नेताओं के दिशा निर्देशों के अनुरूप कदम बढाएंगे।

इस साझा बयान में दोनों देशों के बीच राजनयिक औऱ सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखने पर भी सहमति दी गई है। साझा बयान में सीमा मसले पर प्रधानमंत्रियों के नामजद विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत भी करने पर सहमति हुई है। गौरतलब है कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की गत पांच जुलाई को वीडियो पर बात हुई थी जिसमें हुई सहमति को जमीन पर नहीं उतारा गया है। इस वार्ता में चीन की ओर से माना गया था कि सीमा पर शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिये दोनों देशों की सेनाओं को वास्तविक नियंत्रण रेखा तक वापस लौटना होगा।

लेकिन तब से हालात और गिरे हैं और सीमांत इलाकों में तनाव काफी बढ गया है। भारतीय सेना द्वारा पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर कुछ चोटियों पर कब्जा कर लेने के बाद चीन और बौखला गया है। भारत ने कहा है कि काला टाप और हेलमेट टाप नाम की ये चोटियां भारतीय इलाके में हैं इसलिये भारतीय सेना द्वारा इन पर अपनी सेना बैठाना भारत के अधिकार में है।

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