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Special Report: कोरोना- जापान ने भारत को किया आगाह

विदेश मंत्री एस जयशंकर
प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के प्रसार की आशंका के मद्देनजर भारत द्वारा जापान, ईऱान, इटली, चीन, दक्षिण कोरिया और कई अन्य यूरोपीय देशों के चपेट में आने के बाद इन देशों के नागरिकों को दी गई ई-वीजा को रद्द करने का असर इन देशों के साथ भारत के राजनियक और आर्थिक सम्बन्धों पर पड़ता दिख रहा है।





भारत में कोरोना वायरस के कुछ मामले पाए जाने के बाद भारत ने उन देशों के पर्यटकों और व्यवसायिक विजिटरों के ई- वीजा रद्द कर दिये हैं। इस वजह से भारत आए विदेशी पर्यटकों और उद्यमियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।

इन मसलों पर यहां जापान के राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक पत्र सौंपकर आगाह किया है कि इसका असर भारत के साथ आर्थिक आदान-प्रदान पर पड़ सकता है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक जापान ने भारत से कहा है कि कोरोना वायरस का जापानी लोगों पर मामूली असर पड़ा है इसलिये जापानी नागरिकों की भारत आवाजाही को लेकर भारत सरकार को चिंतित नहीं होना चाहिये।

सूत्रों के मुताबिक भारत में जापान की 14 सौ से अधिक कम्पनियों ने अपना कारोबार शुरू किया है जिनके स्टाफ और उनके परिवारजनों को भारत आना जाना पड़ता है। इसके अलावा भारत में जापान के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिनके इंजनीनियरों औऱ प्रबंधकों की आवाजाही बनी रहती है। खासकर अहमदाबाद से मुम्बई के बीच जापान द्वारा निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन में सैंकड़ों जापानी इंजीनियरों औऱ व्यावसायिक प्रतिनिधियों को तैनात किया गया है। इनकी आवाजाही पर रोक से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को तयशुदा वक्त पर लागू नहीं किया जा सकेगा। गौरतलब है कि भारत सरकार ने जापान से कहा है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अगले तीन साल के भीतर यानी 2023 तक पूरे हो जाने चाहिये।

सूत्रों ने बताया कि जापानी राजदूत ने यहां विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस बारे में मुलाकात का वक्त मांगा है। यहां जापानी व्यापारिक प्रतिनिधियों ने जापानी राजदूत से मिलकर कहा है कि इस मसले को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाना चाहिये अन्यथा भारत में जापानी निवेश कार्यक्रमों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि जापान में कोरोना वायरस से करीब दो सौ लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्टें हैं जिनमें से छह की मौत हो चुकी है। दूसरी ओऱ कोरोना वायरस का सर्वाधिक असर इटली और दक्षिण कोरिया पर पड़ा है जिनके बारे में जापानी राजनयिकों का कहना है कि इन देशों के समकक्ष जापान को नहीं रखा जा सकता है।

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