International

Special Report: चीन को करना होगा नियम आधारित विश्व-व्यवस्था का पालन- यांग

ताइवान का झंडा

ताइपेई। ताइवान के सामरिक मामलों के एक अग्रणी चिंतक एंड्रु न्येन जू यांग ने चीन से कहा है कि उसे नियम आधारित विश्व व्यवस्था का पालन करना होगा। चीन से अलग हुए स्वतंत्र देश के तौर पर अपना अस्तित्व बनाने वाले ताइवान के चाइनीज काउंसिल आफ एडवांस्ड पालिसी स्टडीज के महानिदेशक यांग ने यहां एक बातचीत में कहा कि चीन की गतिविधिया नियम आधारित नहीं हैं जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं।





ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार औऱ उप रक्षा मंत्री रह चुके एंड्रु यांग ने कहा कि चीन की हरकतों से भारी चिंता पैदा होती है। इसके मद्देनजर आपको चीन के इरादों पर ध्यान देना होगा। ताइवान में आगामी 11 जनवरी को होने वाले संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर यांग ने कहा कि चीन इनके मद्देनजर ताइवान की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन की इन हरकतों से चीन की नकारात्मक छवि बन रही है।

यह पूछे जाने पर कि चीन ताइवान से राजनयिक रिश्ते रखने वाले देशों पर रिश्तों को तोड़ने में कामयाब हो रहा है और इस वजह से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान की भूमिका कितनी प्रभावित होगी , यांग ने कहा कि ताइवान से राजनयिक रिश्ते रखने वाले देशों की संख्या में हाल के सालों कमी हुई है लेकिन ताइवान अपनी अंदरूनी राष्ट्रीय ताकत के बल पर अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका निभा रहा है और विभिन्न देशों को हमारी क्षमता पर भरोसा है। गौरतलब है कि ताइवान को फिलहाल संयुक्त राष्ट्र के 193 में से 14 देशों ने ही राजनयिक मान्यता दी हुई है। यांग ने कहा कि हम कई देशों द्वारा ताइवान के साथ राजनयिक रिश्ते रखने को अहमियत देते हैं लेकिन इन पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं। हम अलग थलग नहीं हुए हैं। हम ताइवान के बारे में दुनिया में जागरुकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि ताइवान दुनिया के कई देशों के साथ गैर राजनयिक सम्पर्क रखने के लिये उनकी राजधानियों और महानगरों में सांस्कृतिक और आर्थिक केन्द्रों का संचालन करता है। ताइवान ने इनके जरिये अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों की अपनी ताकत बनाई है।

चीन के साथ सम्पर्को के बारे में यांग ने कहा कि चीन ताइवान के आगामी चुनावो को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा और अपना एक विद्रोही प्रांत की संज्ञा देता है और जिन देशों ने ताइवान के साथ राजनयिक रिश्ते रखे हुए हैं उन्हें लालच दे कर या उन पर दबाव डालकर ताइवान से रिश्ते तोड़ने को बाध्य करता है। यांग ने कहा कि हम चीनी प्रभाव को बेअसर करने के उपाय अपनाते हैं।

हम चीन की मांगों के साथ कोई समझौता नहीं करते हैं लेकिन हम अपने साथी देशों के साथ रिश्ते औऱ उन्हें अधिक मदद देने की कोशिश करते हैं।

ताइवान का संविधान भी एकीकृत चीन का संकल्प लेने वाला है लेकिन ताइवान व्यावहारिक तौर पर चीन से पूरी तरह अलग और एक स्वतंत्र देश के तौर पर काम कर रहा है हालांकि चीन औऱ ताइवान के बीच व्यापारिक आदान प्रदान काफी गहरा हो चुका है। यांग ने कहा कि चीन के साथ रिश्तों को लेकर हम यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं औऱ चीन का सवाल भविष्य की पीढ़ियों पर छोड़ देना चाहते हैं।

यांग ने कहा कि वह नहीं सोचते कि ताइवान के लोगों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने के लिये चीन अच्छा काम कर रहा है। इससे चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा ताइवानी सरकार चीन के साथ सैनिक तनाव नहीं बनाना चाहती है लेकिन इसके साथ ही अपनी सैन्य स्थिति भी मजबूत करने में जुटी हुई है। ताइवान की मौजूदा सरकार ने चीन के प्रति अपना रुख पहले से सख्त किया है क्योंकि चीन का रुख आक्रामक होता जा रहा है।

Comments

Most Popular

To Top