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उ. कोरिया बना रहा है प्लेग-चेचक फैलानेवाले हथियार?

किम जोंग उन

प्योंगयांग। मीडिया में एक स्तब्ध करने वाली खबर चल रही है। खबर है जैविक हथियारों (biological weapons) के बारे में। अमेरिकी थिंक टैंक बेल्फर सेंटर की एक स्टडी में अंदेशा जताया गया है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों के साथ biological weapons भी विकसित कर रहा है। बेल्फर सेंटर की स्टडी में अंदेशा प्रकट किया गया है कि संभव है प्योंगयांग biological weapons तैयार कर रहा हो। दुनिया पहले ही उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों से चिंतित है, अगर स्टडी में जाहिर किए अंदेशे में दम है तो निश्चित ही यह खतरे की बात है।





रिपोर्ट में जाहिर किए अंदेशे के पीछे आधार उन लोगों के बयानों को बनाया गया है जो उत्तर कोरिया की हथियार से जुड़ी टीम में काम कर चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस काम की शुरुआत 1960 के दशक में ही हो गई थी। दरअसल पचास के दशक की शुरुआत में कोरिया में युद्ध छिड़ गया था। लगभग तीन वर्ष चले इस युद्ध के दौरान और बाद में हजारों लोगों की मौत हैजा, टाइफस, टाइफाइड और चेचक की वजह से हो गई थी। उस वक्त उत्तर कोरिया की सरकार ने अमेरिका के जैविक हथियारों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था।

स्तब्ध करने वाली इस रिपोर्ट में अंदेशा यह जताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया अलग- अलग तरह की बीमारियां पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है। अंदेशा इस बात का व्यक्त किया जा रहा है कि उत्तर कोरिया दुनिया की सबसे घातक बीमारियां जैसे चेचक, प्लेग, हैजा और ब्लैक डैथ का हथियार बना सकता है जो महामारी फैलाकर लाखों लोगों को तबाह कर सकते हैं। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियां का मानना है कि उत्तर कोरिया में biological weapons बनाने वाली कम से कम तीन प्रोडक्शन यूनिट और कई रिसर्च सेंटर हैं।

हालांकि रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि उत्तर कोरिया का यह कार्यक्रम किस स्तर पर है या किस गति से चल रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। उत्तर कोरिया इन हथियारों का कैसे इस्तेमाल करेगा इस बारे में भी रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा गया है। अंदेशा इस बात का जताया गया है कि ड्रोन, प्लेन, स्प्रे से बड़े स्तर पर लोगों को मौत के मुंह में धकेला जा सकता है।

रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के biological programme पर ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा गया है कि biological weapons के खिलाफ तैयारी जरूरी है। सेना और स्वास्थ्य सेवाओं को इससे निपटने के लिए तंत्र विकसित करना होगा।

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