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‘ICJ में भारत की जीत बड़ा झटका लेकिन द्विपक्षीय रिश्ते ज्यादा अहम’

लंदन। ऐसा पहली बार है इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में ब्रिटेन का कोई जज नहीं होगा। ICJ में भारत की और से जस्टिस दलवीर भंडारी के दूसरी बार जज चुनें जाने के बाद  तथा ICJ से ब्रिटेन के बाहर होने पर ब्रिटिश मीडिया ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में टोरी पार्टी के सांसद रॉबर्ट जेनरिक ने ICJ से ब्रिटेन के बाहर होने को ‘ब्रिटिश डिप्लोमेसी की बड़ी नाकामयाबी’ बताया है। वहीं दूसरी और ब्रिटेन के इस फैसले को ब्रिटेन के लिए ICJ में एक सीट से कहीं ज्यादा भारत से रिश्तों के लिए अहम कहा जा रहा है।





जेनरिक के मुताबिक यह साफ था कि यूके जनरल असेंबली में अगला दौर पार नहीं कर रहा है जहां भारत इस लिहाज से ज्यादा आकर्षित कर रहा था। हालांकि, ब्रिटने में इस धारणा के प्रति असहमति भी सामने आई।

71 में पहली बार ICJ में नहीं होगा ब्रिटिश जज 

दरअसल न्यूयार्क में 11वें दौर की वोटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही ब्रिटिश दूतावास की ओर से संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र जारी किया गया। इसमें यह घोषणा की गई कि सर क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने हार स्वीकार कर ली है और वह संयुक्त राष्ट्र की हेग स्थित मुख्य कानूनी संस्था में खाली पद को अपने भारतीय प्रतिद्वंद्वी द्वारा भरे जाने को स्वीकार करते हैं। 71 साल के इतिहास में अंतर्राष्ट्रीय अदालत की पीठ में ब्रिटेन का कोई जज नहीं होगा।

‘द इकॉनमिस्ट’ के फॉरन एडिटर रॉबर्ट गेस्ट के अनुसार, ‘मुझे नहीं लगता कि यह ब्रिटेन के लिए बहुत बड़ी बात है जबकि यह भारत के लिए बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा, ‘यह सामान्य सी बात है कि ब्रिटेन थोड़ी नरमी बरतने को तैयार था, क्योंकि सरकार को भारत से अच्छे रिश्ते कायम रखने की काफी चिंता थी क्योंकि सरकार ब्रेग्जिट के बाद भारत के साथ व्यापारिक समझौते करना चाहती है और ब्रिटेन के लिए यह ICJ में एक सीट से कहीं ज्यादा अहम है।

भारत को सीट मिलना जायज : रॉबर्ट गेस्ट

गेस्ट ने कहा कि भारत अभी ऐसी स्थिति में है जहां उसे दुनिया में उसकी वास्तिवक हैसियत के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में कम मान्यता मिली है। भारत बहुत तेजी से एक बड़ी ताकत बनता जा रहा है और उसे एक सीट मिलना बिल्कुल जायज और उचित है। भारतीय मूल के टोरी पार्टी के सांसद शैलेश वारा ने कहा- ‘यह यूके के लिए निराशाजनक है, पर राहत की बात यह है कि यह सीट भारत के पास गई है जो यूके के बहुत करीब है और जिसके साथ हमारा सबसे मजबूत रिश्ता है। अगर भारत की बात करें तो ICJ में भारत की जीत को कई मामलों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है । बता दें की पाकिस्तान की जेल में कैद कुलभूषण यादव मामले की सुनवाई भी अंतर्राष्ट्रीय अदालत में चल रही है ऐसे में यह जीत भारत के लिए बेहद अहम है ।

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