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अब सियासत में उतरने की फिराक में हाफिज सईद

हाफिज-सईद

इस्लामाबाद। पाकिस्तान का आतंकी हाफिज सईद अब सियासत के मैदान में उतरना चाहता है। खबरों के मुताबिक हाफिज सईद चुनाव लड़ने की योजना पर काम कर रहा है और इसके लिए उसने अपने संगठन जमात-उद-दावा की तरफ से बाकायदा पार्टी का रजिस्ट्रेशन करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग में उसने अपनी राजनीतिक पार्टी को मान्यता देने के लिए अर्जी भी दे दी है। अपनी पार्टी का नाम उसने मिल्ली मुस्लिम लीग रखा है।





सोची-समझी रणनीति का हिस्सा

गौरतलब है कि हाफिज सईद पिछले छह महीने से नजरबंद है। हाफिज सईद के राजनीति के अखाड़े में उतरने के फैसले को जानकार सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मानते हैं। पाकिस्तान में इस वक्त सियासी उथल-पुथल चल रही है। पनामा पेपर्स मामले में नवाज शरीफ को सत्ता छोड़नी पड़ी है। विपक्षी पार्टियां एकजुट नहीं हैं।

सेना और आईएसआई में है अच्छी पैठ

ऐसे वक्त में हाफिज सईद को संभवतः लगता है कि राजनीति में कदम जमाने का इससे बेहतर मौका और कोई नहीं हो सकता। जानकारों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग हाफिज सईद की अर्जी को हरी झंडी दिखा देता है तो हाफिज सईद राजनीति के मैदान में पैर जमा सकता है क्योंकि पाकिस्तान सेना और आईएसआई में भी उसकी अच्छी पैठ है।

मुंबई आतंकी हमले का मास्टर माइंड जनवरी से नजरबंद

मुंबई आतंकी हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद पिछली 31 जनवरी से घर में नजरबंद है। दो दिन पहले ही उसकी नजरबंदी को दो महीने के लिए बढ़ाया गया है। इसके पहले पाकिस्तानी पंजाब प्रांत की सरकार ने तीन महीने के लिए इस नजरबंदी को बढ़ाया था। सईद मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है।

‘लॉ एंड ऑर्डर’ के लिए खतरा है हाफिज

इस साल 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाले जाने के फौरन बाद पाकिस्तान ने हाफिज सईद को नजरबंद किया था। उसे 31 जनवरी को जब पहली बार नजरबंद किया गया था, तब अवधि तीन महीने बताई गई थी। इसके बाद यह मियाद 90 दिन बढ़ाई गई। हाफिज ने इसके खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में अर्जी भी दायर की, जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि वह ‘लॉ एंड ऑर्डर’ के लिए खतरा साबित हो सकता है।

अमेरिका के दबाव में हुई नजरबंदी

गत 20 जनवरी को ट्रंप के औपचारिक तौर पर सत्ता संभालने के पहले से पाकिस्तान पर अमेरिका ने दबाव बनाना शुरू कर दिया था। हाफ़िज़ सईद की गिरफ्तारी और नज़रबंदी पहले भी कई बार हुई है, लेकिन पाकिस्तान की सरकार अदालत में उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। वह भी तब जब मुंबई हमले मामले में भारत ने डोज़ियर भर-भरकर पाकिस्तान को सबूत दिए हैं। भारत उसके खिलाफ लगातार कार्रवाई की मांग करता रहा है।

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