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पाकिस्तान में बनेगा चीनी लड़ाकू विमान

चीनी विमान
प्रतीकात्मक फोटो

लास एंजेल्स से ललित मोहन बंसल

अमेरिका ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद क्या रोकी कि चीन को एक मौक़ा मिल गया। चीन की शुरू में ही यह कोशिश रही थी कि वह व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से क्षेत्र में इतना सुदृढ़ हो जाए कि उसका कोई सानी न रहे। चीन ने पाकिस्तान की पूर्ववर्ती सरकारों के साथ चीन पाकिस्तान आर्थिक कारिडोर(सीपीईसी) की संरचना भी उसी दृष्टि से की गई थी।आज ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर’ की आड़ में पाकिस्तान चीन की मदद से अपनी वायु सेना को सबल बनाने में जुटा हुआ है। इसके लिए पाकिस्तान में अमेरिका के एफ- 16 की तर्ज़ पर जे एफ- 17 लड़ाकू विमान बनाए जाने पर क़रीब-क़रीब सहमति हो चुकी है। यह नई पीढ़ी का लड़ाकू विमान होगा। शुरू में चीन क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से पाकिस्तान को नेविगेशन सिस्टम, राडार प्रणाली और ऑन बोर्ड हथियारों के निर्माण में मदद करेगा। इसके लिए पाकिस्तान में पंजाब में जे एफ- 17 लड़ाकू विमान बनाने के लिए ‘कामरा एयरोनाटिक्ल कम्पलेक्स’ का चयन कर लिया गया है जहाँ लड़ाकू विमान के विभिन्न हिस्सों को जोड़ कर लड़ाकू विमान तैयार होगा। नई सरकार में जैसे ही आर्थिक कारिडोर के ऋण और इसकी अदायगी को ले कर सरकारी और ग़ैर सरकारी स्तरों पर चर्चा हुई तो चीन सरकार को यह नागवार गुज़रा। इस पर पाकिस्तान सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा प्रधान मंत्री इमरान खान के दौरे से छह सप्ताह पूर्व ‘गुप-चुप’ चीन जा कर राष्ट्रपति शी जिन फ़िंग को आश्वस्त कर आए कि पाकिस्तानी सेना आर्थिक कारिडोर को पूर्ण संरक्षण देगी। इमरान खान पिछले महीने पेइचिंग हो आए और कहा जा रहा है कि इस योजना पर इस्लामाबाद की अब कभी भी मोहर लग सकती है।





न्यू यॉर्क टाइम्स के अनुसार पश्चमी राजनयिकों की मानें तो चीन का मूल उद्देश्य पाकिस्तान में लड़ाकू विमान और सैन्य सामग्री तैयार किए जाने के मूलत: दो उद्देश्य हैं। एक, पाकिस्तान को आर्थिक कॉरिडोर के रूप एक आदर्श मिसाल के रूप में प्रस्तुत करना है। दूसरे, सामरिक दृष्टि से उन देशों को चीन के प्रति उन्मुख करना है जिनका अमेरिका से मोह भंग हो चुका है। इसके लिए चीन की पुरज़ोर कोशिश होगी कि वह दक्षिण चीन सागर में अपने आक्रामक रूख की तर्ज़ पर मित्र देशों को बैलिस्टिक मिसाइल जैसे आग्नेय अस्त्र-शस्त्रों की आपूर्ति करने में भी नहीं हिचकिचाएगा। पाकिस्तान की पहली कोशिश मुस्लिम वर्ल्ड के देशों को हथियारों की आपूर्ति करना होगा।

चीन ने जी पी एस नेटवर्क की तुलना में पाएतू नेविगेशन सिस्टम तैयार किया है, जिसमें नागरिक और मिलिट्री सेवाओं के दोनों वर्जन हैं। यह सिस्टम पाकिस्तान में सफल रहा तो वह इसका उपयोग भली भांति अपने प्रभाव के क्षेत्रों में कर सकता है। चीन ने पाकिस्तान में साल 2020 तक बेल्ट एंड रोड परियोजना के अन्तर्गत 35 सेटेलाइट स्टेशन बनाए जाने का लक्ष्य रखा है। एक बार इन स्टेशनों के संचालित होने के बाद चीन की कोशिश होगी कि वह इस पूरे के पूरे सिस्टम पर अपनी निगाह बनाए रख सके। विदित हो, चीनी प्रशासन यह बराबर कहता आ रहा है कि बेल्ट एंड रोड परियोजना विशुद्ध रूप से आर्थिक और शांति पूर्ण कार्यों के लिए है, जबकि यह परियोजना चीन और पाकिस्तान की मिलिट्री महत्वकांक्षाओं को परिलक्षित करती है।

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