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डोकलाम के हल के लिये चीन का प्रभावी उपाय, जारी किया रक्षा पर श्वेत पत्र

सिक्किम सीमा
फाइल फोटो

नई दिल्ली। चीन ने कहा है कि  डोकलाम  मसले के प्रभावी और शांतिपूर्ण  हल के लिये  अनुकूल माहौल पैदा करने के इरादे से  वह असरकारी उपाय कर रहा है। चीन सरकार ने साल 2019 के लिये जारी अपने रक्षा श्वेत पत्र में कहा है कि  चीन की सशस्त्र सेनाएं भारत से लगी सीमा पर स्थिरता औऱ सुरक्षा का माहौल पैदा करने के लिये  कोशिश  कर रही है।





गौरतलब है कि जून से सितम्बर, 2016 तक भारत और चीन की सेनाओं के बीच भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके में भारत औऱ चीन के सैनिक अढ़ाई महीने तक आमने सामने तैनात हो गए थे। चीन बार बार धमकी दे रहा था कि भारत को इसके काफी बुरे नतीजे भुगतने होंगे। लेकिन भारतीय  सेना अपने इलाके की रक्षा के लिये डट कर खाड़ी रही और चीनी सैनिकों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान भारत और चीन के बीच भारी राजनयिक औऱ सैनिक तनाव पैदा हो गया था।

 54 पेजों के इस श्वेत पत्र में चीन ने 18 बार भारत का जिक्र किया है लेकिन भारत के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है। श्वेत पत्र के मुताबिक दक्षिण एशिया आम तौर पर स्थिर है हालांकि भारत औऱ पाकिस्तान के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं। तिब्बत, ताइवान और शिनच्यांग का जिक्र करते हुए श्वेत पत्र में कहा गया है कि अलगाववादियों के खिलाफ लड़ाई काफी उग्र हो गई है।  तिब्बत की आजादी और पूर्वी तुर्किस्तान के लिये  विदेशी ताकतें सक्रिय हैं जो चीन की  राष्ट्रीय सुरक्षा औऱ एकता को खतरा पहुंचा रही हैं।  इसी संदर्भ में श्वेत पत्र में कहा गया है कि  चीनी सेनाएं घरेलू सुरक्षा खतरे का सामना कर रही है।

भारत औऱ कुछ अन्य बड़ी ताकतों के साथ अपने  रक्षा खर्च की तुलना करते हुए श्वेत पत्र में कहा गया है कि चीन  छठा सबसे बड़ा खर्च करने वाला देश है। साल 2012 से 2017 के बीच रक्षा पर कुछ देशों के निवेश के आंकड़े देते हुए चीन ने कहा कि भारत अपने  रक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 प्रतिशत खर्च करता है जब कि चीन ने रक्षा पर अपना  खर्च औसतन 1.3 प्रतिशत बताया है। श्वेत पत्र के मुताबिक अमेरिका ने उस अवधि में 3.5 प्रतिशत, रूस ने 4.4 प्रतिशत , ब्रिटेन ने  2.0 प्रतिशत,  फ्रांस ने 2.3 प्रतिशत,  जापान ने एक प्रतिशत औऱ जर्मनी ने  1.2 प्रतिशत खर्च किये।

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