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चीन की अमेरिका को धमकी, गलती सुधारें, वरना अंजाम भुगतने को रहे तैयार

राष्ट्रपति ट्रंप और जिनपिंग

बीजिंग। अमेरिका ने चीन, उत्तर कोरिया और रूस के लोगों तथा कंपनियों पर बैन लगाने की कार्रवाई की थी। इन पर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम में सहयोग करने और अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी का आरोप था। चीनी कंपनियों और लोगों पर प्रतिबंध का यह इस साल का दूसरा मौका है। जून में मनी लॉन्ड्रिग के आरोपों की वजह से बैंक ऑफ डैनडॉग को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।





चीन अमेरिका के इस कार्रवाई से बौखला गया है। चीन के सरकारी अखबार में लिखे इडिटोरियल में अमेरिका की कड़ी आलोचना की गई है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि चीनी कंपनियों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को चीन कभी स्वीकार स्वीकार नहीं करेगा। वैसे चीन पर इस थोड़ा का असर देखने को मिल सकता है लेकिन चीन ने कभी कोई नियम-कानूनों का उल्लंघन नहीं किया। अगर अमेरिका के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन किया है तो वह डिप्लोमैटिक चैनल्स के माध्यम से बात कर सकता था।

ग्लोबल टाइम्स के अनुसार उत्तर कोरिया को लेकर चीन पूरी गंभीरता से यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के नियमों का पालन कर रहा है। वह उत्तर कोरिया को कोयला, लोहा तथा अन्य सामानों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाएगा। यदि कोई भी कंपनी इस नियमों का पालन नहीं करती है तो चीनी कानून के मद्देनजर सजा दी जाएगी।

चीन के अनुसार, अमेरिका ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया है और लगाए गए बैन एकतरफा और अनुचित हैं। इस लेख में कहा गया है कि किसी एक बात को लेकर अमेरिका यह कैसे कह सकता है कि चीन और उत्तर कोरिया के बीच अवैध कारोबार हो रहा है ? इस तरह के पाबंदियों से अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन और रूस की छवि धूमिल करना चाहता है।

ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका को धमकी भरे लहजे में लिखा है, यदि इन पाबंदियों से अमेरिका को यह लगता है कि वह चीन पर दबाव बना लेगा तो वह भ्रम में है। अमेरिका के खिलाफ चीन हर जरूरी कदम उठा सकता है जो वह चाहता है, इसलिए अमेरिका पहले अपने गिरेबां में झांके।

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