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मसूद को आतंकी घोषित करने में चीन फिर बना दीवार

आतंकी मसूद अजहर

संयुक्त राष्ट्र। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के रास्ते में चीन एक बार फिर दीवार बन गया। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन के मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी सूची में डालने के प्रस्ताव को चीन ने एक बार फिर वीटो कर दिया। मसूद अजहर पठानकोट एयरबेस हमले का मुख्य साजिशकर्ता है। हमला पिछले वर्ष की शुरूआत में हुआ था। इसके अलावा और भी बहुत से मामलों में उसका हाथ है। तकनीकी आधार पर चीन ने इस प्रस्ताव को दो नवंबर तक अटकवा दिया है। चीन बार-बार इस प्रस्ताव पर वीटो कर रहा है।





चीन ने पिछली बार फरवरी में आपत्ति दर्ज कर इस प्रस्ताव को रुकवाया था। यह रोक 2 अगस्त तक थी। चीन अगर इस बार आपत्ति न करता तो प्रस्ताव स्वतः मंजूर हो जाता और अजहर मसूद का नाम संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकियों की लिस्ट में जुड़ जाता। वैश्विक आतंकी घोषित होने का नतीजा यह होता कि उसकी संपत्ति कुर्क हो जाती और वह दुनिया में कहीं भी आ-जा नहीं पाता।

पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद भारत ने यूएनएससी 1267 के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए अनुरोध किया था। भारत के आवेदन को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का समर्थन है। इस वर्ष फरवरी में अमेरिका ने यह प्रस्ताव फिर पेश किया था। यूएनएससी 1267 से किसी सहमति की बात नहीं है, यह कहकर चीन इस कदम का विरोध कर रहा है। चीन कहता रहा है कि इस मामले पर वह समय आने पर फैसला करेगा।

जानकारों का मानना है कि डोकलाम मुद्दे पर भारत-चीन के बीच विवाद को देखते हुए लगता नहीं कि तीन महीने बाद भी चीन के रुख में कोई तब्दीली आयेगी।

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