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चीन और रूस की बढ़ती ताकत से पश्चिमी देशों के वर्चस्व को चुनौती

चीन और रूस की बढ़ती ताकत

नई दिल्ली। थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटिजिक स्टडीज (IISS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन और रूस की बढ़ती सैन्य ताकत अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चुनौती बनती जा रही है। थिंक टैंक की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी देश पहले जिस रणनीतिक फायदे की वजह से ताकतवर स्थिति में रहते थे, अब वैसी बात नहीं रही है। रिपोर्ट में जिस तरह से चीन की बढ़ती ताकत के बारे में बताया गया है वह भारत के लिए भी चिंता की बात बन सकती है।





IISS की इस रिपोर्ट मिलिटरी बैलेंस 2018 में हालांकि कहा गया है कि महाशक्तियों के बीच युद्ध का अंदेशा भले ही निश्चित नहीं है लेकिन इस बारे में चेताया गया है कि रूस और चीन किसी भी संघर्ष की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयारियों में लगे हुए है। चीन किस तरह शक्तिशाली हथियारों का जखीरा इकट्ठा कर रहा है रिपोर्ट में इस बारे में भी काफी विस्तार से लिखा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन जमीन, आकाश और पानी सभी जगह अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है। चीन ने कुछ अर्सा पहले ही रेडार की पकड़ में न आने वाले J-20 स्टेल्थ विमानों को अपने बेडे में शामिल करने की घोषणा की थी। वर्ष 2020 तक ये लड़ाकू विमान उसके बेड़े में शामिल हो जायेंगे। गौरतलब है कि अभी तक इस तरह के स्टेल्थ विमान सिर्फ अमेरिका के पास हैं। चीन का Air-to-Air PL-15 मिसाइल सिस्टम भी कुछ ही देशों के पास है।

चीन अपनी नौसेना की ताकत भी बेहद आक्रामकता के साथ बढ़ा रहा है। पिछले 15 वर्षों में चीन ने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों और पनडुब्बियों का निर्माण किया है। इसी अवधि में जापान, भारत और दक्षिण कोरिया ने कुल जितने युद्धपोत और पनडुब्बियां बनाई हैं, उससे ज्यादा अकेले चीन ने बनाए हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि पिछले चार वर्ष के दौरान चीन ने जितने युद्धपोतों और सहायक सेना को लांच किया है वह फ्रांस की पूरी नौसेना से कहीं ज्यादा है। इतना ही नहीं चीन जिबूती (अफ्रीका) में अपना नौसैना बेस तैयार कर चुका है।

इधर हाल के वर्षों में रूस ने भी अपनी ताकत में इजाफा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि फंडिंग और व्यावसायिक कारणों से रूस का सैन्यीकरण का काम कुछ धीमा जरूर है लेकिन सीरिया और युक्रेन में युद्ध से मिल रहे अनुभव का रूस को पूरा फायदा मिल रहा है। साइबर हमलों से निपटने की क्षमता में भी रूस ने काफी इजाफा कर लिया है। रिपोर्ट कहती है कि रक्षा तकनीक और निर्माण के मामले में पश्चिमी देशों का एकाधिकार अब खत्म हो रहा है। रिपोर्ट तो यहां तक कहती है कि चीन आगे भी निकल सकता है।

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