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चीन से लगती 4,000 किमी लंबी सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाएगा भारत

चीनी सैनिक

नई दिल्ली। चीन की चालाकियों से निपटने के लिए भारत अब चीन की सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाएगा। चीन के साथ लगती 4000 किलोमीटर लंबी सीमा के नजदीक निर्माण कार्यों को तेजी दी जाएगी। एक अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक ऐसे संकेत हैं कि सेना की कुछ महत्वपूर्ण फॉर्मेशन में संगठनात्मक बदलाव भी हो सकते हैं। सेना के कमांडर सम्मेलन में ये फैसले लिए गए हैं।





सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चीन सीमा से लगे नीती, लिपुलेख, थांगला1 और संगचोकला दर्रे को सड़क से जोड़ने का फैसला किया गया है। प्राथमिकता के आधार वर्ष 2020 तक इसे पूरा करने की योजना बनाई गई है। सड़क और अन्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सड़क सीमा संगठन (BRO) को अतिरिक्त पैसा मुहैया कराया जाएगा।

स्टाफ ड्यूटी के महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) ले. जनरल विजय सिंह ने सम्मेलन में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तरी सेक्टर में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण गतिविधियों को चलाने का फैसला लिया गया है ताकि सेना किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए सेना हर समय तैयार रहे। लगभग एक हफ्ता चले इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय के कई शीर्ष अधिकारियों ने भी भाग लिया। सम्मेलन में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

ने कमांडरों को किसी भी तरह की परिस्थिति के लिए तैयार हर वक्त तैयार रहने को कहा है। सेना प्रमुख ने हथियार एवं गोला-बारूद की खरीद पर भी जोर दिया।

बिपिन रावत ने सभी कमांडरों को किसी भी तरह की परिस्थिति के लिए हमेशा तैयार रहने को कहा।

सम्मेलन को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी संबोधित किया और आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने में सेना के प्रयासों की तारीफ भी की। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि किसी भी भावी चुनौती से निपटने के लिए सभी सेनाएं एक साथ मिलकर प्रयास करें।

 

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