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भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में मदद करेगा अमेरिका

भारतीय सेना व अमेरिकी सेना

वाशिंगटन। अमेरिका के एक टॉप सैनिक कमांडर ने कहा है कि भारत की सेना के आधुनिकीकरण में अमेरिका मदद करेगा। पिछले दशक में दोनों देशों के बीच सैनिक सामग्री का व्यापार 15 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। अगले कुछ साल में यह और तेज गति से बढ़ने की आशा है। भारत इन दिनों जेट विमानों, यूएवी और विमानवाहक पोतों की तकनीक को लेकर अमेरिकी सहयोग की तलाश कर रहा है।





सामरिक सहयोगी देश बन चुका है भारत

अमेरिका की प्रशांत कमांड के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस ने एक भारतीय संवाद समिति को बताया कि मेरी समझ से अमेरिका भारतीय सेना की इस आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में शामिल होने को तैयार है। भारत अब अमेरिका का सामरिक सहयोगी देश बन चुका है। यानी अब भारत उसी स्तर पर है, जिस स्तर पर अमेरिका के दूसरे सामरिक सहयोगी देश हैं।

दोनों देश अर्से से कर रहे हैं युद्धाभ्यास

एडमिरल हैरिस के अनुसार दोनों देश एक लंबे अर्से से मालाबार संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। सन 1995 के मालाबार युद्धाभ्यास में मैं भी शामिल था। इस अभ्यास का स्तर काफी बेहतर हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि अब इसमें जापान भी शामिल हो चुका है।

खुशी है भारत RIMPAC में भी भाग ले रहा है

उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका-जापान सहयोग बहुत ही महत्वपूर्ण है। अब इसमें ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करना चाहिए। हिंद महासागर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के काफी सामूहिक हित हैं। हमें खुशी इस बात की है कि भारत रिम ऑफ द पैसिफिक एक्सरसाइज़(RIMPAC) में भी भाग ले रहा है, जो हर दो साल में हवाई में होती है।

दोनों देशों के बीच हुआ विचार-विमर्श

उनसे पूछा गया कि भारत ने दक्षिण चीन सागर में भारत-अमेरिका संयुक्त गश्त के प्रस्ताव को ठुकराया, इस पर आपकी राय क्या है। उन्होंने कहा, हमें इस पर कोई निराशा नहीं है। बल्कि हमें इस बात पर खुशी है कि इस विषय पर दोनों देशों के बीच विचार-विमर्श हुआ। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत और अमेरिका ने हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियों की सूचना के आदान-प्रदान की व्यवस्था की है, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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