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संत मस्त कलंदर की दरगाह लहूलुहान, 100 मरे

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सहवान शहर में स्थित लाल शाहबाज कलंदर दरगाह एक आतंकी हमले से दहल गई। गुरुवार को रात में हुए इस आत्मघाती हमले में 100 लोगों की मौत हो गई और 150 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी विश्व के सबसे बड़े आतंकी संगठन आईएसआईएस ने ली है।





आईएसआईएस

आतंकी संगठन आईएसआईएस ने हमले की जिम्मेदारी ली

आईएसआईएस ने अपनी समाचार एजेंसी अमाक के जरिए हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि आत्मघाती हमलावर ने दरगाह में शिया लोगों को निशाना बनाया। विस्फोट दरगाह परिसर में उस जगह पर हुआ, जहां सूफी अनुष्ठान ‘धमाल’ चल रहा था। हर गुरुवार को दरगाह पर काफी भीड़ होती है।

एक सप्ताह के अंदर यह पांचवां आतंकी हमला

पाकिस्तान में एक सप्ताह के अंदर यह पांचवां आतंकी हमला है। हमलावर ‘सुनहरे गेट’ से दरगाह के भीतर दाखिल हुआ और पहले उसने ग्रेनेड फेंका, लेकिन वह नहीं फटा। पुलिस के मुताबिक, यह धमाका सूफी रस्म ‘धमाल’ के दौरान हुआ। विस्फोट के समय दरगाह के परिसर के भीतर सैकड़ों की संख्या में जायरीन मौजूद थे।

दरगाह

पाकिस्तान की लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह पर आत्मघाती हमला

सहवान के एसएसपी ने बताया कि आत्मघाती हमलावार ने अफरा-तफरी मचाने के लिए पहले ग्रेनेड फेंका और फिर खुद को उड़ा लिया। मृतकों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। पाकिस्तान में साल 2005 से देश की 25 से ज्यादा दरगाहों पर हमले हुए हैं।

आतंकी हमले के बाद आपात स्थिति घोषित कर दी गई है और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। सेना ने कहा कि सी130 विमान के जरिए घायलों को नवाबशाह लाया जाएगा। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस हमले की निंदा की और पाकिस्तान के लोगों से एकजुट होकर खड़े होने की अपील की।

सूफी दरगाह पर यह हमला उस वक्त हुआ है जब एक दिन पहले ही पाकिस्तान सरकार ने देश में आतंकी हमलों में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए उन सभी तत्वों को मिटाने का संकल्प लिया था जो देश में शांति और सुरक्षा पर खतरा पैदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देश में सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की, जिसमें यह फैसला लिया गया। वहीं, दूसरी तर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि खून की हर बूंद का बदला आतंकवादियों से जल्द लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की असेंबली के बाहर एक विरोध रैली के दौरान आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया था, जिससे दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि इस हमले में करीब 60 अन्य घायल हुए थे।

सूफी संत लाल शाहबाज कलंदर

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सहवान कस्बे की जिस लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह पर आत्मघाती हमला हुआ वह दरअसल दुनिया भर में मशहूर ‘दमादम मस्त कलंदर’ वाले सूफी संत लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह है। इस दरगाह की कहानी बहुत रोचक है। इस दरगाह का निर्माण 1356 कराया गया था।

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लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह

सूफी दार्शनिक और संत लाल शाहबाज कलंदर का असली नाम मुहम्मद उस्मान मरवंदी (1177-1275) था। वह पीर सैयद हसन खैबरुद्दीन के बेटे थे। बताया जाता है कि वह लाल कपड़ा पहनते थे। इसलिए उनके नाम के आगे लाल जोड़ दिया गया। मशहूर गाना ‘दमादम मस्त कलंदर’ इन्हीं संत के सम्मान में तैयार किया गया। इस गाने को तैयार करने में गायिका नूरजहाँ, उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान और आबिदा परवीन की अहम भूमिका थी। इस मजार गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। यहाँ सिंध प्रांत के हिन्दू भी जाते हैं। कहा जाता है कि शहबाज कलंदर सिंध प्रांत के हिन्दुओं के पूज्य झूलेलाल के अवतार हैं। आपको बता दें कि दमादम मस्त कलंदर गाने में कुछ इस तरह झूलेलाल का भी जिक्र है… ‘झूले-झूले लाल दम मस्त कलंदर’। संत कलंदर के पुरखे बगदाद से ताल्लुक रखते थे।

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