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NSG ने आखिर क्यों किया स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया का चयन ?

स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया

नई दिल्ली। 27 जिले..70 डॉग्स…और 800 से ज्यादा बम अब तक खोजे जा चुके हैं ये बात जितनी सरल लग रही है उतनी है नहीं क्योंकि नक्सलियों द्वारा इन बमों का इस्तेमाल किया गया होता तो अब तक न जाने कितने बेगुनाहों की जानें चली गई होती। इन सैंकड़ों बमों को ढ़ूंढ़ निकालने का काम प्रशिक्षित डॉग्स के जरिए किए गए हैं। भिलाई के प्रशिक्षित डॉगों ने कई बड़े और संगीन आपराधों से पर्दा उठाया है। नक्सल क्षेत्रों में कई बार यहां के स्नीफर डॉग्स ने बम खोज निकाला जिससे धमाका होने से पहले उन्हें निष्क्रिय किया जा सका।





ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षित डॉग्स ने नक्सलियों के इरादों पर पानी फेरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां से ट्रेन्ड डॉग्स नक्सल इलाकों से अब तक 8 सौ से ज्यादा बम खोज निकाले हैं। इन सभी बमों को निष्क्रिय किया जा चुका है। इतना ही नहीं इन प्रशिक्षित डॉग्स के कारण 400 से ज्यादा चोरी, लूटपाट और मर्डर जैसे गंभीर अपराधों को सुलझाने में पुलिस को काफी सहयोग मिला है।

150 से ज्यादा डॉग्स को मिला प्रशिक्षण

भिलाई में साल 2007 से डॉग प्रशिक्षिण केंद्र की शुरुआत हुई। अब तक इस केंद्र से लगभग 150 डॉग्स ट्रेनिंग पा चुके हैं। इनमें से राज्य भर में 27 जिलों में पदस्त 70 डॉग्स काम कर रहे हैं। सीएएफ 7वीं बटालियन के डॉग ट्रेनिंग सेंटर में क्राइम को सुलझाने के लिए इन्हें खास प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, डॉबरमैन और बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के डॉग्स को प्रशिक्षण देकर उन्हें विस्फोटक, चोर और लूट की घटना के बाद अपराधी तक पहुंचने की ट्रेनिंग दी जाती है।

2016 से बेल्जियम शेफर्ड डॉग्स चुने जा रहे हैं

डॉग प्रशिक्षण केंद्र में पहले जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर और डॉबरमैन नस्ल के डॉग्स को ट्रेनिंग दी जाती थी पर वर्ष 2016 से बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के डॉग्स को चुना जाने लगा है। इसकी वजह यह है कि ये डॉग्स काफी फुर्तीले होते हैं और इनकी उम्र बी अन्य नस्ल के डॉग्स के मुकाबले ज्यादा होती है।

फिलहाल 5 बेल्जियम शेफर्ड डॉग्स को दी जा रही है ट्रेनिंग

स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया

स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया (फाइल)

डॉग प्रशिक्षण केंद्र में इस वर्ष 05 बेल्जियम शेफर्ड डॉग्स रॉली, रोजी रीतू, रोमी और लूसी नाम के डॉग्स को उनके डैंडलरों के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें खास जगहों पर पदस्थापित किया जाएगा।

प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेंड स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया का चयन राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) दिल्ली की ट्रेनिंग के लिए हुआ है। दो फीमेल डॉग्स लेब्राडोर नस्ल की हैं। चयन के लिए 10 प्रांतों के स्नीफर डॉग पहुंचे थे। जया फिलहाल धमतरी और ग्रेसी बिलासपुर में है। जया ने 2015 और ग्रेसी ने 2016 में भिलाई के डॉग प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेंड हुई थी। गौरतलब है कि इन्सान के अलावा सिर्फ डॉग्स ही ऐसा प्राणी है जो फेस के हाव-भाव को भांप लेता है और इशारे भी आसानी से समझ लेता है।

 

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