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7 कारण: भारत का ताकतवर नेतृत्व दे रहा है चीन को चुनौती !

भारतीय सेनाएं

नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल चीन में ब्रिक्स देशों के सुरक्षा सलाहकारों के सम्मेलन में भाग लेकर वापस आ गए हैं, पर भारत-चीन सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ है। अजित डोभाल की चीन में हुई बातचीत के बाद भी लगता है कि चीन सरकार संतुष्ट नहीं है। अलबत्ता दोनों देश फिलहाल संयम बरत रहे हैं। इसके अलावा संभव है कि अंदर ही अंदर राजनयिक वार्ताएं चल रहीं हो, जिनमें भूटान भी शामिल हो।





चीनी घमंड और भारत की दृढ़ता

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

एशिया-प्रशांत के सामरिक हालात पर नजर रखने वाली पत्रिका ‘डिप्लोमैट’ के वेब संस्करण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो महीने में चीनी मीडिया की तमाम फुलझड़ियों के बावजूद इस बार भारत चीनी धमकियों के सामने झुक नहीं रहा है। वैश्विक विशेषज्ञों को विस्मय है कि ऐसा क्यों हो रहा है। भारत की दृढ़ता का एक बड़ा कारण है चीन का अतिशय घमंड। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एशिया में चीनी नेतृत्व में नई व्यवस्था कायम करने का जो बीड़ा उठाया है, वह भारत को मंजूर नहीं है। भारत में लंबे समय बाद ताकतवर नेतृत्व आया है, जो चीनी दादागीरी को चुनौती दे रहा है।

परंपरागत नीतियों को छोड़ नई परंपरा की शुरुआत

नरेंद्र-मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी सरकार ने तिब्बत और ताइवान के संदर्भ में भारत सरकार की परंपरागत नीतियों को खारिज करके इन दोनों क्षेत्रों के नेताओं को निमंत्रित करने की परंपरा शुरू की है। मई 2014 में उनके शपथ ग्रहण समारोह में तिब्बत की प्रवासी-सरकार और ताइवान के व्यापार प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस बात ने चीन के सामने नई परिस्थितियों को जाहिर कर दिया था।

भारतीय सेना के आक्रामक तेवरों को देख पीछे हटा चीन

भारतीय और चीनी सैनिक

बॉर्डर पर भारतीय और चीनी सैनिक (फाइल फोटो)

रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2014 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा के समय दक्षिण लद्दाख के चुमार क्षेत्र में चीन के 1000 सैनिकों ने घुसपैठ कर दी। उस मौके पर भारत की आक्रामक रणनीति पहली बार देखने को मिली। भारत ने दो दिन में देखते ही देखते 9000 फौजियों को उस इलाके में उतार दिया। इस वजह से चीनी सेना को पीछे हटना पड़ा। इसी तरह एक और मुकाबला 2015 में अरुणाचल के यांग्त्से इलाके में हुआ। वहाँ भी भारतीय सेना आक्रामक होकर सामने आई।

उत्तरी सीमांत में खड़ा हो रहा है बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर

भारतीय सीमा पर मुस्तैद सेना (प्रतीकात्मक)

भारतीय सेना की यह आक्रामकता अचानक नहीं है। आज वह बेहतर सैनिक साजो-सामान से लैस है। समूचे उत्तरी सीमांत पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो रहा है।

सेना की ताकत बढ़ा रही है सरकार

NGARM

न्यू जेनरेशन एंटी रेडिएशन मिसाइल (NGARM)

मौजूदा सरकार चीनी सेना के जवाब में अपनी ताकत को बढ़ा रही है। देश की मिसाइलें अग्नि, आकाश और ब्रह्मोस तैयार खड़ी हैं। इसी तरह पनडुब्बियों से मार करने वाली के सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइलों का कार्यक्रम गोपनीयता के घेरे में है, पर उसके कारण भारत का नाभिकीय त्रिकोण यानी जमीन, आकाश और समुद्र की क्षमता जाहिर हो चुकी है। इसी तरह हाल में स्पेशल फोर्सेस डिवीजन और एक सायबर स्पेस एजेंसी की स्थापना भी हुई है।

लद्दाख में है पर्याप्त सेना

आईटीबीपी-जवान

आईटीबीपी के जवान (फाइल फोटो)

भारत ने लद्दाख में एक अतिरिक्त इनफेंट्री ब्रिगेड स्थायी रूप से तैनात कर रखी है। नॉर्दर्न कमांड की रिजर्व डिवीजन-39-अब उस ऊँचाई वाले ठंडे रेगिस्तान पर नियमित अभ्यास करती है। सन 2013 में भारत ने टी-72 टैंकों की एक रेजिमेंट तैनात की थी। अब भारत लद्दाख में पूरी टैंक ब्रिगेड तैनात कर रहा है। पूर्व में सन 2009 के बाद खड़ी की गई 56 और 71 माउंटेन डिवीजन तैनात हैं, जिनकी वजह से पर्याप्त संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं। वायुसेना ने चीनी सीमा के पास सुखोई-30 लड़ाकू विमान तैनात कर रखे हैं।

अरुणाचल में ‘एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड परियोजना’ पूरी

C- 17 एयरक्राफ्ट

C- 17 एयरक्राफ्ट की सुरक्षित लैंडिंग (फाइल फोटो)

अरुणाचल प्रदेश में एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (हवाई अड्डों) की परियोजना पूरी हो चुकी है। इस इलाके में ब्रह्मोस मिसाइल तैनात हैं। हिंद महासागर में नौसेना की ताकत बढ़ती जा रही है। कुल मिलाकर भारतीय सेना चीन के मुकाबले तैयार है।

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