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इस बार शहीदों के लिए 15,000 किलोमीटर दौड़ेगा यह कृष्ण भक्त

मुंबई। वह कृष्ण भक्त है लेकिन वह भक्ति के अलावा एक और काम करता है। वह हर रोज दौड़ता है। दौड़ भी छोटी-मोटी नहीं। सौ किलोमीटर की। उसने कुछ ही महीने पहले 100 दिन तक हर रोज 100 किलोमीटर दौड़ने का अनूठा कारनामा दिखाया था। इस अनूठे धावक और कृष्ण भक्त का नाम है समीर सिंह। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश के किसान परिवार से संबंधित समीर सिंह अब देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले शहीदों और उनके परिजनों के लिए 15 हजार किलोमीटर लंबी दौड़ का अभियान शुरू करना चाहते हैं।





समीर सिंह भगवान कृष्ण के भक्त हैं और अपनी दौड़ने की क्षमता का श्रेय वह भगवान को देते हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ आस्था के बल पर ही इस तरह की दौड़ लगाई जा सकती है। मंदसौर के कान्याखेड़ा गांव में किसान परिवार में जन्मे समीर सिंह ने वर्ष 2004-05 में पहली बार मैराथन में हिस्सा लिया था और उसके बाद से दौड़ना उनके जीवन का हिस्सा बन गया। उन्हें जब दुनिया की बड़ी-बड़ी दौड़ों के बारे में पता चला तो उन्होंने तय किया कि वह कुछ अनूठा करेंगे। पिछले वर्ष उनके मन में आया कि क्यों न वह हर रोज 100 किलोमीटर दौड़ें और वह भी लगातार 100 दिन। लेकिन मन में संशय भी था कि क्या वह इतना दौड़ पाएंगे?  एक दिन सपने में भगवान कृष्ण दिखाई दिये तो आस्था दृढ़ हो गई कि अब कोई भी स्थिति उन्हें दौड़ने से नहीं रोक सकती। इसी वर्ष अप्रैल में उन्होंने दौड़ना शुरू किया और 100 दिन में अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। समीर की प्रेरणा और ताकत भगवान कृष्ण हैं।

समीर

अपने अभियान की तैयारी के लिए समीर को मार्गदर्शन इस्कॉन मंदिर के अपने गुरु राधिका कन्हाई प्रभुजी से मिला। उन्होंने तैयारी करने के लिए वृंदावन जाने का सुझाव दिया। नवंबर 2016 में समीर वृंदावन चले गए। समीर अपने अभ्यास की शुरुआत वृंदावन से करते। वृंदावन की परिक्रमा 10 किलोमीटर की, फिर वहां से राधाकुंड तक 21 किलोमीटर और उसके बाद गोवर्धन की 24 किलोमीटर की परिक्रमा और उसके बाद वृंदावन तक वापस 21 किलोमीटर। कुल मिलाकर समीर हर रोज 75 किलोमीटर दौड़ने लगे। सप्ताह में दो-तीन बार दौड़ने का अभ्यास जल्द ही छह दिन में बदल गया। मार्च 2017 में वह मुंबई लौट आए और 100 दिन का अपना अभियान पूरा कर दिखाया।

अब समीर ने शहीदों और उनके परिजनों के लिए 15 हजार किलोमीटर दौड़ना तय किया है। उनका यह अभियान अगले महीने दिसंबर में वाघा बॉर्डर से शुरू होगा और पांच महीने बाद वहीं समाप्त होगा। इन पांच महीनों में वह देश के लगभग हर राज्य में जाएंगे। उनके अभियान को समर्थन देने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बलों के जवान भी उनके साथ दौड़ेंगे।

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