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स्पेशल रिपोर्ट: भारतीयों को लाने के लिए युद्धपोत, विमान तैयार

आईएनएस शार्दुल

नई दिल्ली। विदेशों में गत डेढ़ महीने से फंसे हजारों भारतीयों को स्वदेश लाने के लिये भारतीय नौसेना के युद्धपोत और वायुसेना के परिवहन विमान तैयार खड़े हैं। इनमें से 04 युद्धपोतों को रवाना कर दिया गया है। 02 युद्धपोत मालदीव के लिये भेजे गए हैं जब कि 02 युद्धपोत खाड़ी के मुल्कों को भेजे गए हैं। इसके अलावा 12 देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिये 60 यात्री विमान भी तैयार खडे हैं।





विदेशों में फेंसे भारतीयों को निकालने की कार्रवाई 07 मई से शुरू होगी।

खाड़ी के मुल्कों , यूरोप और अमेरिका मे फंसे लाखों भारतीयों को लाने के लिये नरेन्द्र मोदी सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने अपने लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस शार्दुल, आईएनएस मगर और जलश्व को विदेशें में फेंसे भारतीयों को निकालने के लिये जरूरी कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि खासकर खाड़ी के मुल्कों में लाखों लोगों के रोजगर छिन गए हैं और वहां की सरकारों ने प्रवासी कामगारों को स्वदेश चले जाने के लिये कहा है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के कम से कम 30 परिवहन विमान और नौसेना के 11 युद्धपोत तैयार रखे गए हें। विदेशी सरकारों की अनुमति मिलते ही इन विमानों को वहां भेजा जाएगा। गौरतलब है कि 1990 में खाड़ी के युद्ध के दौरान भारत ने इतिहास की सबसे बड़ी निकासी की थी जिसमें 1.7 लाख भारतीयों को वहां से निकालकर स्वदेश लाया गया था। पांच साल पहले मोदी सरकार ने यमन पर सऊदी अरब के हमले के बाद छिड़े युद्ध की वजह से एक हजार विदेशियों सहित 5500 भारतीयों को सुरक्षित निकाला था।

सूत्रों ने बताया कि नौसेना और वायुसेना ने विदेशों से भारतोयों को निकालने के लिये मानक प्रक्रिया तय कर ली है। यात्री विमानों से जो भारतीय स्वदेश लौटेंगे उन्हें किराये का भुगतान करना होगा। गौरतलब है कि 25 मार्च के पहले जिन भारतीयों को विदशों से लाया गया था उनसे किराया नहीं लिया गया था।

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