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स्पेशल रिपोर्ट : भारत-चीन की सेनाएं आपस में भिडीं, दोनों पक्षों के सैनिक हुए हताहत

सीमा पर चीनी सेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली।  भारत और चीन के बीच 45 सालों  बाद सोमवार देर शाम को गलवान नदी घाटी इलाके में  हुई पहली बडी झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक भारी संख्या में हताहत हुए हैं। हालांकि भारतीय पक्ष ने एक कर्नल सहित तीन सैनिकों के मारे जाने की बात कबूल की है चीनी पक्ष ने भी अपने सैनिकों के हताहत होने की बात स्वीकार की है लेकिन इसकी निश्चित संख्या नहीं बताई है। लेकिन अपुष्ट खबरों के मुताबिक चीनी सेना के पांच सैनिक मारे गए हैं औऱ 11 घायल हुए हैं।





 हालात को काबू में करने के लिये मंगलवार दिन भर  दोनों सेनाओं के बीच  ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत हुई है।

यह घटना पूर्वी लद्दाख के गलवान नदी इलाके में हुई जब प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक गलवान नदी के इलाके से दोनों सैनिक पीछे हटने पर हुई परस्पर सहमति को लागू कर रहे थे। गौरतलब है कि उत्तरी लद्दाख के कई इलाकों में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गत पांच मई से ही तनातनी चल रही है। इन इलाकों में चीनी सैनिकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा को पार किया जिसे चुनौती दिये जाने पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच मुठभेड हुई थी। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच धक्कामुक्की हुई जिसमें कई भारतीय सैनिक घायल हो गए थे। लेकिन इस घटना के बाद दोनों देशों ने हालात को काबू में किया और मसले को सुलझाने के लिये सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला शुरु किया और अंततः दोनों पक्षों के बीच छह जून को सर्वोच्च लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने दावा किया था कि हालात काबू में और  स्थिर हैं।

दोनों  ओर की सेनाओं ने इस मुठभेड के दौरान गोलियों के आदान प्रदान की बात नहीं की है ।  इसलिये केवल पत्थरबाजी से ही दोनों पक्षों के सैनिक इतनी संख्या में हताहत हुए यह बात हैरान करने वाली है। भारत और चीन के बीच पिछली बार 1975 में अरुणाचल प्रदेश के इलाके में झड़प हुई थी जिसमें केवल चार भारतीय. सैनिकों के मारे जाने की रिपोर्टें हैं। इस घटना के लिये चीनी सेना ने भारतीय सेना को जिम्मेदार ठहराया था। इस वारदात में भारतीय सेना की असम राइफल्स के जवान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्ती कर रहे थे कि उसी दौरान चीनी सेना ने उन्हें चुनौती दी और इस दौरान चार भारतीय. सैनिक शहीद हए।

दोनों देशों के बीच ताजा  विवाद तब शुरु हुआ जब चीनी सेना ने  उत्तरी लद्दाख में  वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय इलाके में भारतीय. सेना द्वारा सडक बनाए जाने का विरोध किया था। भारतीय सेना ने इसे चुनोती दी तो चीनी सैनिकों ने इस इलाके में भारी संख्या में अपने सैनिक तैनात कर दिये।

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