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स्पेशल रिपोर्ट: जनरल रावत बने पहले प्रधान सेनापति

सेनापति बिपिन रावत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। तीन साल तक भारत के थलसेना का दायित्व सम्भालने वाले जनरल बिपिन रावत भारत के  पहले ‘चीफ आफ डिफेंस स्टाफ’ यानी प्रधान सेनापति होंगे। सरकार ने इस आशय का ऐलान यहां सोमवार को किया।





गौरतलब है कि एक दिन पहले ही सरकार ने एक अधिसूचना के जरिये यह एलान किया था कि प्रधान सेनापति के रिटायर करने की उम्र 65 साल की होगी। चूंकि जनरल बिपिन रावत तीन साल का सेवाकाल पूरा करने के बाद 31 दिसम्बर को थलसेना प्रमुख के तौर पर रिटायर कर रहे हैं और वह आगामी मार्च को 62 साल के होंगे इसलिये माना जा रहा है कि  जनरल रावत को ध्यान में रखकर ही  प्रधान सेनापति के रिटायर करने की उम्र 65 साल करने का ऐलान किया गया।

गौरतलब है कि प्रधानसेनापति का पद सृजित करने के फैसले का ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हुए किया था। इस पद की स्थापना करने की सिफारिश 1999 के करगिल युद्ध के नतीजों की समीक्षा के लिये के सुब्रह्मण्यम ने करगिल समीक्षा समिति की अध्यक्षता करने के बाद अपनी रिपोर्ट में की थी। बाद में साल 2009 में नरेश चंद्र की अध्यक्षता में गठित एक औऱ समिति ने अपनी सिफारिश में इसकी पुष्टि की थी।

दो दशकों तक विभिन्न सरकारों में चली गहन समीक्षा और विचारविमर्श के बाद मोदी सरकार ने अंततः चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन की सिफारिश कर दी। इस पद को  बनाने को लेकर यूपीए सरकारों के दौरान संसद में पूछे गए विभिन्न सवालों के जवाब में यही कहा जाता था कि इस मसले पर राजनीतिक आम राय नहीं बन पा रही है।

जनरल रावत अपने पद पर तीन साल तक देश की तीनो सेनाओं के सफल संचालन और इसमें तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी सम्भालेंगे। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल स्थापित करना उनकी बड़ी चुनौती होगी। तीनों सेनाएं अपने अपने स्तर पर समान किस्म के हथियारों के इस्तेमाल की मांग सरकार के सामने रखती थीं। मसलन वायुसेना ने जब अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टरों की सप्लाई की मांग सरकार के सामने रखी तब थलसेना ने भी कहा कि उसकी वैमानिकी शाखा के लिये भी इसी तरह के हेलिकॉप्टरों की जरूरत है ताकि वह अपनी जमीनी सेना को हवाई समर्थन प्रदान कर दुश्मन की जमीनी सेना पर हावी हो सके। अंततः सरकार ने वायुसेना के अलावा थलसेना को भी अमेरिका से आयातित चिनूक हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर औऱ अपाचे हमलावर हेलिकॉप्टर मुहैया कराने का फैसला किया। वास्तव में थलसेना और वायुसेना के बीच तालमेल से समान किस्म के संसाधनों का सक्षम इस्तेमाल हो सकता है।

 इस प्रकरण के मद्देनजर नये चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के समक्ष तीनों सेनाओं के लिये आवंटित बजट के सक्षम इस्तेमाल की एक बड़ी चुनौती होगी।

 चूंकि भविष्य के किसी भी युद्ध में तीनों सेनाओं के एकीकृत इस्तेमाल की जरूरत होगी इसलिये जरूरी है कि तीनों सेनाएं साझा रणनीति से युद्ध के दौरान अपने संसाधन तैनात करें।

 इसके मद्देनजर नये सेना प्रमुख के समक्ष तीनों सेनाओं के संयुक्त इस्तेमाल के लिये थियेटर कमांड बनाने की सबसे अहम जिम्मेदारी होगी।

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