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‘आज़ाद हिन्द फौज’ पर लाल किले में चले मुकदमे से जुड़ी 6 खास बातें

अपनी फौज से बोले नेताजी दिल्ली चलो, दिल्ली चलो…





वर्ष 1943 में 5 जुलाई को सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी फौज को संबोधित करते हुए कहा-‘हथियारों की ताकत और खून की कीमत से तुम्हें आजादी प्राप्त करनी है। फिर जब भारत आजाद होगा तो आजाद देश के लिए तुम्हें स्थायी सेना बनानी होगी, जिसका काम होगा हमारी आजादी को हमेशा-हमेशा बनाए रखना…..

मैं वादा करता हूं कि अंधेरे और उजाले में, दुख और सुख में, व्यथा और विजय में तुम्हारे साथ रहूंगा… मैं भूख, प्यास, प्रयाण पंथ और मृत्यु के सिवा कुछ नहीं दे सकता। पर अगर तुम जीवन और मृत्यु-पथ पर मेरा अनुसरण करोगे तो मैं तुम्हें विजय और स्वाधीनता तक ले जाऊंगा…

मेरे वीरो! तुम्हारा युद्धघोष होना चाहिए-दिल्ली चलो! दिल्ली चलो! आजादी की इस लड़ाई में हममें से कितने बचेंगे, मैं नहीं जानता, पर मैं यह जानता हूं कि अंत में हम जीतेंगे और जब तक हमारे बचे हुए योद्धा एक और कब्रगाह-ब्रिटिश साम्राज्यवाद की कब्रगाह- दिल्ली के लालकिले पर फतह का परचम लहरा नहीं लेते, हमारा मकसद पूरा नहीं होगा।’ (पुस्तक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, लेखक-शिशिर कुमार बोस)

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