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जब पाकिस्तानी अफसर ने कहा, ‘मैं आपके बेटे को सेल्यूट करता हूं’ शहीद अरुण खेत्रपाल से जुड़ी 9 खास बातें

भारतीय सेना की जांबाजी के आपने ढेरों किस्से सुने होंगे होंगे। इन्हीं जांबाज सैनिकों में एक नाम है परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल। उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अकेले ही पाकिस्तानी सेना के 7 टैंक ध्वस्त कर दिए थे। उस समय अरुण खेत्रपाल की उम्र थी महज 21 वर्ष। अरुण खेतरपाल की जांबाजी के कुछ किस्से हम आपको बता रहे हैं जिन्हें जानकार आप भी भारतीय सेना के जवानों पर गर्व करेंगे।





17वीं पूना हॉर्स रेजिमेंट के थे अरुण खेत्रपाल

अरुण खेतरपाल भारत पाकिस्तान के बीच 1971 की लड़ाई के दौरान 17वीं पूना हॉर्स रेजिमेंट में थे। पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर शकरगढ़ इलाके में घुसने की कोशिश की थी। 16 मद्रास के कमांडिंग ने खबर भिजवाई थी कि एक बड़े हमले के लिए पाकिस्तानी टैंक जमा हो रहे हैं, अगर भारतीय टैंक समय पर नहीं पहुंचे तो उन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा। पाक आर्मी की घुसपैठ की खबर के बाद भारतीय सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया। उन्हें 1500 वर्ग गज़ के इलाके को पार करना था जिसमें बारूदी सुरंगें बिछी हुई थीं जैसे ही पाकिस्तानियों ने जवाबी हमला शुरू किया 17 हॉर्स केबी स्क्वाड्रन के कमांडर ने पीछे से और टैंक भेजे जाने की मांग की। कैप्टन मल्होत्रा, लेफ़्टिनेंट अहलावत और सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को केबी स्क्वाड्रन की मदद के लिए भेजा गया। 16 दिसंबर की सुबह पूना हॉर्स के टैंक एक लाइन बनाते हुए आगे बढ़ गए।

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